कर्नाटक में निजी संस्थानों में 5% दिव्यांग आरक्षण का बड़ा प्रस्ताव 2025

0 Divya Chauhan
कर्नाटक दिव्यांग आरक्षण मसौदा विधेयक 2025 की प्रमुख जानकारी

कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित नया ड्राफ्ट बिल निजी क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोजगार और शिक्षा में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। यह बिल अभी कानून नहीं है, लेकिन इसके आने से निजी संस्थानों और शिक्षण संस्थाओं की ज़िम्मेदारियाँ बढ़ेंगी। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर देना और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है।

ड्राफ्ट बिल के अनुसार, कर्नाटक राज्य में 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले निजी प्रतिष्ठानों को अपने कुल स्वीकृत पदों में से 5 प्रतिशत पद दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुरक्षित रखने होंगे। यह प्रावधान सीधी भर्ती और नियमित पदों दोनों पर लागू होगा।

ड्राफ्ट बिल का मुख्य उद्देश्य

इस बिल का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि दिव्यांग नागरिकों को निजी क्षेत्र में भी वही अवसर मिलें, जो सरकारी संस्थानों में मिलते हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर RPwD कानून केवल सरकारी नियुक्तियों पर अनिवार्य प्रावधान देता है। निजी क्षेत्र में इस तरह का बंधन नहीं है। यही कारण है कि यह बिल लोगों का ध्यान खींच रहा है।

निजी क्षेत्र में 5% आरक्षण कैसे लागू होगा?

ड्राफ्ट बिल के अनुसार, जिन निजी संस्थानों में 20 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें अपने स्वीकृत पदों में 5 प्रतिशत पद विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुरक्षित करने होंगे। यह आरक्षण अलग-अलग विकलांगता श्रेणियों में विभाजित होगा। विभाजन का तरीका और श्रेणियों का अनुपात एक राज्य स्तरीय प्राधिकरण तय करेगा।

यदि किसी भर्ती में दिव्यांग श्रेणी के पद खाली रह जाते हैं, तो संस्थान उन पदों को तीन भर्ती चक्रों तक आगे बढ़ा सकता है। तीन चक्रों के बाद भी पद खाली रहें तो स्थिति रिपोर्ट बनाकर प्राधिकरण को देना अनिवार्य होगा।

क्या सभी निजी नौकरियाँ इस आरक्षण के दायरे में आएँगी?

नहीं। बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी पद के मूल कार्य ऐसे हों जिन्हें दिव्यांग व्यक्ति उचित सुविधा मिलने के बाद भी नहीं कर सकता, तो उन पदों को आरक्षण से छूट मिलेगी। इसे “उचित सुविधा” (reasonable accommodation) कहा गया है, जिसमें सहायक उपकरण, कार्यस्थल में बदलाव, शांत वातावरण, विशेष कुर्सी, रैंप आदि शामिल हैं।

जरूरी बात: यह बिल दिव्यांग व्यक्तियों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें कार्य का सही वातावरण देने पर जोर देता है, न कि केवल पद सुरक्षित करने पर।

नियोक्ताओं की नई जिम्मेदारियाँ

ड्राफ्ट बिल निजी प्रतिष्ठानों पर कई नई जिम्मेदारियाँ डालता है। इसे लागू करने के लिए कंपनियों को अपने ऑफिस में संरचनात्मक और व्यावहारिक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

  • कार्यस्थल को दिव्यांग-अनुकूल बनाना
  • रैंप, व्हीलचेयर मार्ग और शौचालय में सुधार
  • विशेष उपकरण उपलब्ध कराना
  • कार्य का समय लचीला रखना
  • दिव्यांग कर्मचारियों के लिए अलग रिकॉर्ड तैयार करना
  • हर साल अनुपालन रिपोर्ट जमा करना

इन बदलावों का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्ति को सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल देना है, ताकि वे बिना भेदभाव के काम कर सकें।

अनुपालन न करने पर दंड

यदि कोई निजी प्रतिष्ठान इस बिल के नियमों का पालन नहीं करता, तो राज्य सरकार जुर्माना लगा सकती है। जुर्माना 10,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक हो सकता है।

यदि कोई व्यक्ति गलत दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लेने की कोशिश करता है, तो उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना और दो वर्ष तक का कारावास भी संभव है।

शिक्षण संस्थानों पर 10% आरक्षण

बिल का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कर्नाटक राज्य के प्रत्येक शिक्षण संस्थान को हर कोर्स में 10 प्रतिशत सीटें दिव्यांग छात्रों के लिए सुरक्षित करनी होंगी।

इसके साथ ही कॉलेजों और स्कूलों को नीचे दिए गए कार्य भी करने होंगे:

  • प्रवेश प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना
  • परीक्षाओं में उचित सुविधा देना
  • उम्र सीमा में पाँच वर्ष की छूट
  • कट-ऑफ में पाँच प्रतिशत की छूट
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और सामग्री को accessible बनाना

इस प्रावधान से दिव्यांग छात्रों के लिए शिक्षा में नया अवसर खुलेगा और समानता को मजबूती मिलेगी।

बिल लागू होने पर निजी कंपनियों में क्या बदलाव आएँगे?

यदि यह ड्राफ्ट बिल कानून बन जाता है, तो कर्नाटक राज्य की निजी कंपनियों में कई परिवर्तन देखने को मिलेंगे। कंपनियों को अपनी कार्य योजनाओं, भर्ती प्रक्रिया और कार्यालय ढाँचे में बदलाव करना पड़ेगा। यह परिवर्तन केवल दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अवसर बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे निजी क्षेत्र में समानता और सम्मान का वातावरण बनाने के लिए किया जा रहा है।

ड्राफ्ट बिल स्पष्ट करता है कि जिन प्रतिष्ठानों में 20 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें अपने सभी स्वीकृत पदों का 5 प्रतिशत हिस्सा दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित रखना ही होगा। यहाँ “स्वीकृत पद” से मतलब उन पदों से है जिन्हें संस्था आधिकारिक रूप से अपने ढाँचे में मानती है। चाहे वह पद भरा हुआ हो या खाली, वह आरक्षण की गणना में शामिल होगा।

5% आरक्षण का व्यावहारिक असर

जब कंपनियाँ इस आरक्षण को लागू करेंगी, तो उन्हें अपने कई विभागों में दिव्यांग व्यक्तियों को अवसर देना पड़ेगा। काम का स्वरूप भले अलग हो, लेकिन उचित सुविधा देकर अधिकांश पदों को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनुकूल बनाया जा सकता है।

उपयुक्त पदों के उदाहरण

  • लेखा और दस्तावेज़-संबंधी कार्य
  • डिजिटल कार्य
  • कार्यालय समन्वय
  • कस्टमर सहायता विभाग
  • तकनीकी प्रशिक्षण

इनमें से अधिकांश कार्य उचित सुविधा देने पर दिव्यांग व्यक्ति सहजता से कर सकते हैं। ऐसे पदों में यह आरक्षण प्रभावी सिद्ध होगा।

“उचित सुविधा” (Reasonable Accommodation) का अर्थ

बिल में सबसे महत्वपूर्ण शब्द है “उचित सुविधा”। इसका मतलब है कि संस्था को दिव्यांग व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार कार्यस्थल में आवश्यक बदलाव करने होंगे। ये बदलाव बहुत बड़े नहीं होते, बल्कि छोटे-छोटे परिवर्तन होते हैं जो कार्य को सरल बनाते हैं।

उचित सुविधा लाभ
व्हीलचेयर मार्ग और रैंप स्वतंत्र आवाजाही
विशेष कुर्सी/टेबल शारीरिक सहारा
सहायक उपकरण काम सरल
लचीला समय सुविधा और स्थिरता

इन सुविधाओं को लागू करने से दिव्यांग कर्मचारी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

दिव्यांग श्रेणी का विभाजन कैसे होगा?

बिल के अनुसार, 5 प्रतिशत आरक्षण को अलग-अलग दिव्यांग श्रेणियों में बाँटा जाएगा। श्रेणियाँ तय करना और प्रतिशत का विभाजन करना राज्य स्तर पर बनने वाली “नियामक प्राधिकरण” (Regulatory Authority) की जिम्मेदारी होगी।

इसमें निम्न मुख्य श्रेणियाँ शामिल होंगी:

  • दृष्टि संबंधी विकलांगता
  • श्रवण विकलांगता
  • गतिशीलता में बाधा
  • मानसिक या बौद्धिक विकलांगता
  • दीर्घकालिक बीमारी से जुड़ी विकलांगता

विभाजन ऐसा होगा कि हर श्रेणी को पर्याप्त अवसर मिले और किसी एक श्रेणी को पूरा आरक्षण न मिले।

खाली पदों को आगे बढ़ाने का नियम

यदि किसी वर्ष दिव्यांग श्रेणी के लिए सुरक्षित पद भर नहीं पाते, तो निजी प्रतिष्ठान उन्हें तीन भर्ती चक्रों तक आगे बढ़ा सकते हैं। इसे "कॅरी-फॉरवर्ड" प्रक्रिया कहा जाता है।

उदाहरण: यदि किसी कंपनी में 50 पद हैं, तो 5% यानी 2.5, जिसे 3 पद माना जाएगा। यदि इनमें से एक भी पद नहीं भर पाता, तो कंपनी अगले तीन चक्रों में उसे फिर से भरने की कोशिश करेगी।

शिक्षण संस्थाएँ क्या बदलाव करेंगी?

ड्राफ्ट बिल का दूसरा बड़ा भाग शिक्षा से जुड़ा है। कर्नाटक के सभी शिक्षण संस्थानों को हर कोर्स में 10 प्रतिशत सीटें दिव्यांग छात्रों के लिए सुरक्षित रखनी होंगी।

शिक्षा संस्थानों के नए दायित्व

  • प्रवेश प्रक्रिया को सुलभ बनाना
  • डिजिटल सामग्री को हर दिव्यांग छात्र के अनुकूल बनाना
  • परीक्षा में अतिरिक्त समय
  • कट-ऑफ में पाँच प्रतिशत की छूट
  • उम्र सीमा में पाँच वर्ष तक छूट

इन प्रावधानों से दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश आसान होगा और पाठ्यक्रम पूरा करने में भी सुविधा मिलेगी।

नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) की भूमिका

बिल एक नए राज्य-स्तरीय प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव रखता है। इस प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी कि वह आरक्षण नीति की निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि निजी प्रतिष्ठान नियमों का पालन कर रहे हैं।

  • वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट लेना
  • नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाना
  • शिकायतों का समाधान करना
  • नए नियम और दिशानिर्देश जारी करना
  • आरक्षण के पदों का उचित विभाजन तय करना

इस प्राधिकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार और मजबूत होंगे।

कंपनियों के लिए व्यावहारिक तैयारी: 5% आरक्षण लागू करने का तरीका

यदि यह ड्राफ्ट बिल कानून बन जाता है, तो कर्नाटक की निजी कंपनियों को अपनी पूरी भर्ती प्रक्रिया को नए नियमों के अनुसार ढालना पड़ेगा। कंपनियों को यह तय करना होगा कि किन विभागों में दिव्यांग व्यक्तियों को अवसर दिया जा सकता है और कार्यस्थल की संरचना कैसी होगी। यह केवल एक कानूनी आवश्यकता नहीं है, बल्कि कार्यस्थल में निष्पक्षता और समावेशन का महत्वपूर्ण कदम होगा।

कंपनियों को शुरुआती स्तर पर अपने सभी स्वीकृत पदों की सूची बनानी होगी। इसके बाद प्रत्येक विभाग में यह देखना होगा कि कौन से पद दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। यह काम एक जिम्मेदार समिति या मानव संसाधन विभाग के मार्गदर्शन में किया जा सकता है।

दस्तावेज़ीकरण और रिकॉर्ड रखना

आरक्षण लागू करने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है सही दस्तावेज़ीकरण। कंपनियों को हर वर्ष अपनी अनुपालन रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में यह जानकारी होगी:

  • कुल स्वीकृत पद
  • इनमें से 5 प्रतिशत पदों की सूची
  • कितने पद भरे गए
  • कितने पद खाली रह गए
  • कॅरी-फॉरवर्ड किए गए पदों का विवरण
  • कार्यस्थल पर दी गई “उचित सुविधाएँ”

यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाती है और सुनिश्चित करती है कि कंपनियाँ दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों का सम्मान कर रही हैं।

5% आरक्षण का सकारात्मक प्रभाव

आरक्षण का उद्देश्य केवल रोजगार प्रदान करना नहीं है, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों को सम्मान, सुरक्षा और स्थिरता देना है। इस आरक्षण से निजी क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

संभावित लाभ प्रभाव
अवसरों में समानता दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अधिक रोजगार
कार्यस्थल में सुधार अनुकूल वातावरण और सुविधा
कंपनी की सकारात्मक छवि सामाजिक जिम्मेदारी मजबूत
कौशल का बेहतर उपयोग दिव्यांग व्यक्तियों की क्षमता उजागर

इन प्रभावों से न केवल दिव्यांग व्यक्तियों को लाभ मिलेगा, बल्कि कंपनियाँ भी अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार माहौल विकसित कर पाएँगी।

शिक्षण संस्थानों में 10% आरक्षण का वास्तविक महत्व

शिक्षा जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। यदि दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा में अधिक अवसर मिलते हैं, तो उनका आत्मविश्वास, कौशल और भविष्य की संभावनाएँ तेजी से बढ़ती हैं। यही कारण है कि ड्राफ्ट बिल में शिक्षण संस्थानों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान रखा गया है।

इसके साथ ही प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली और डिजिटल सामग्री को दिव्यांग छात्रों के अनुकूल बनाना भी अनिवार्य किया जाएगा। इसका अर्थ है कि:

  • दृष्टि बाधित छात्रों के लिए स्क्रीन-रीडर सामग्री
  • श्रवण बाधित छात्रों के लिए कैप्शन या सांकेतिक भाषा
  • गतिशीलता बाधित छात्रों के लिए भवनों में रैंप और लिफ्ट
  • परीक्षा में अतिरिक्त समय
  • कट-ऑफ और आयु सीमा में छूट

इन उपयों से उच्च शिक्षा सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होगी और दिव्यांग छात्रों का भविष्य अधिक मजबूत होगा।

बिल अभी ड्राफ्ट रूप में क्यों है?

यह समझना आवश्यक है कि यह बिल अभी केवल प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य लोगों और संस्थानों से सुझाव लेना है। जब तक यह बिल विधानसभा से पारित नहीं होता और राज्य सरकार इसकी अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक यह लागू नहीं होगा।

ड्राफ्ट चरण में होने का लाभ यह है कि उद्योग, शिक्षा संस्थान, दिव्यांग संगठन और आम लोग अपनी राय सरकार तक पहुँचा सकते हैं। इससे बिल और अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बन सकता है।

भविष्य में क्या बदलाव संभव हैं?

जब यह बिल अंतिम रूप में आएगा, तो उसमें कुछ संशोधन संभव हैं। सरकार यह भी तय कर सकती है कि आरक्षण कितनी जल्दी लागू होगा, क्या छूट मिलेगी, कौन-सी नौकरियाँ अनिवार्य होंगी और कौन-सी नहीं।

इसके अलावा “नियामक प्राधिकरण” की शक्तियाँ और प्रक्रियाएँ भी अंतिम नियमों में विस्तृत रूप से दर्ज की जाएँगी।

अंतिम निष्कर्ष

कर्नाटक का यह ड्राफ्ट बिल दिव्यांग व्यक्तियों को निजी क्षेत्र और शिक्षा में नए अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह कानून बन जाता है, तो निजी कंपनियों में 5 प्रतिशत और शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण से समाज में समानता और सम्मान का माहौल मजबूत होगा।

यह बिल केवल एक आरक्षण नीति नहीं है, बल्कि समावेश और संवेदनशीलता की ओर बढ़ता वास्तविक परिवर्तन है। अब सबकी नज़र इस पर है कि यह कब तक पारित होता है और अंतिम नियम क्या होंगे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.