Rent Agreement में क्या ध्यान रखें: किराए पर घर लेने से पहले जरूरी बातें

0 Divya Chauhan
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Rent agreement में क्या ध्यान रखें यह सवाल हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो किराए पर घर लेने जा रहा है। अक्सर लोग जल्दबाजी में agreement साइन कर देते हैं और बाद में परेशानी झेलते हैं। किराए का घर चाहे छोटा हो या बड़ा, agreement की शर्तें साफ होना बहुत जरूरी है।

Rent agreement सिर्फ एक कागज नहीं होता। यह किरायेदार और मकान मालिक दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय करता है। अगर इसमें छोटी सी भी गलती रह जाए, तो आगे चलकर विवाद हो सकता है।

Rent agreement क्या होता है और क्यों जरूरी है

Rent agreement एक लिखित समझौता होता है। यह मकान मालिक और किरायेदार के बीच किया जाता है। इसमें किराया, अवधि, नियम और शर्तें लिखी होती हैं।

बहुत लोग बिना agreement के भी घर ले लेते हैं। शुरू में सब ठीक लगता है। लेकिन जैसे ही कोई समस्या आती है, तब कोई कानूनी सहारा नहीं रहता। यही वजह है कि rent agreement बेहद जरूरी होता है।

बिना agreement Agreement के साथ
कानूनी सुरक्षा नहीं कानूनी अधिकार सुरक्षित
किराया विवाद किराया स्पष्ट लिखा होता है
निकालने का डर नियम अनुसार नोटिस

Rent agreement दोनों पक्षों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

Rent agreement की अवधि कितनी होनी चाहिए

Agreement की अवधि बहुत अहम होती है। आमतौर पर 11 महीने की अवधि रखी जाती है। इसके पीछे कानूनी कारण होते हैं।

अगर अवधि ज्यादा रखी जाए, तो registration जरूरी हो सकता है। इसलिए ज्यादातर लोग 11 महीने का agreement बनवाते हैं और बाद में नवीनीकरण कराते हैं।

किरायेदार को यह साफ देखना चाहिए कि agreement की शुरुआत और समाप्ति की तारीख सही लिखी हो।

अवधि गलत लिखी होने पर कानूनी परेशानी हो सकती है।

Rent amount और payment की शर्तें

Rent agreement में किराए की राशि साफ और स्पष्ट लिखी होनी चाहिए। शब्दों और अंकों दोनों में लिखा होना बेहतर माना जाता है।

इसके साथ यह भी लिखा होना चाहिए कि किराया किस तारीख तक देना है। देर होने पर जुर्माना लगेगा या नहीं, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

बिंदु क्या देखें
किराया राशि अंकों और शब्दों में
भुगतान तारीख हर महीने की तय तारीख
जुर्माना देर होने पर शर्त

किराए से जुड़ी शर्तें साफ होंगी तो विवाद नहीं होगा।

Security deposit में क्या ध्यान रखें

Security deposit वह राशि होती है जो किरायेदार शुरुआत में देता है। यह मकान की सुरक्षा के लिए होती है।

Agreement में यह साफ लिखा होना चाहिए कि deposit कितनी है और कब वापस की जाएगी। कई बार मकान खाली करते समय इसी मुद्दे पर झगड़ा होता है।

  • Deposit की राशि स्पष्ट हो
  • वापसी की शर्तें लिखी हों
  • कटौती का कारण बताया गया हो

Security deposit को लेकर अस्पष्टता नुकसानदायक हो सकती है।

Rent बढ़ाने की शर्तें जरूर पढ़ें

Rent agreement में किराया बढ़ाने की शर्त भी लिखी होती है। बहुत लोग इस हिस्से को ध्यान से नहीं पढ़ते।

यह साफ होना चाहिए कि कितने समय बाद किराया बढ़ेगा और कितने प्रतिशत बढ़ेगा। बिना लिखित शर्त के अचानक बढ़ाया गया किराया गलत माना जाता है।

किरायेदार को चाहिए कि इस हिस्से को समझकर ही agreement साइन करे।

Maintenance और repairs की जिम्मेदारी किसकी होगी

Rent agreement में maintenance से जुड़ी शर्तें बहुत ध्यान से पढ़नी चाहिए। अक्सर यहीं से विवाद शुरू होते हैं। कई बार किरायेदार मान लेता है कि सारी मरम्मत मकान मालिक कराएगा, जबकि agreement में कुछ और लिखा होता है।

यह साफ लिखा होना चाहिए कि छोटी मरम्मत कौन कराएगा और बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी। पानी की टंकी, बिजली की वायरिंग, दीवारों की सीलन जैसी चीजें आमतौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी होती हैं।

काम जिम्मेदारी
नल, स्विच की छोटी मरम्मत किरायेदार
पानी की टंकी मकान मालिक
छत से पानी टपकना मकान मालिक
दरवाजे की कुंडी किरायेदार

Maintenance की जिम्मेदारी लिखित रूप में होना जरूरी है।

बिजली, पानी और अन्य बिल किसके जिम्मे होंगे

Rent agreement में यह बात साफ होनी चाहिए कि बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं का बिल कौन देगा। कई बार मकान मालिक और किरायेदार की समझ अलग होती है।

अगर अलग मीटर लगा है, तो भुगतान सीधा किरायेदार करता है। अगर मीटर साझा है, तो बिल बांटने का तरीका लिखा होना चाहिए।

  • बिजली बिल की जिम्मेदारी
  • पानी का शुल्क
  • सोसायटी चार्ज
  • कचरा और सफाई शुल्क

बिल से जुड़ी अस्पष्टता आगे परेशानी बन सकती है।

घर का उपयोग किन कामों के लिए किया जा सकता है

Rent agreement में यह भी लिखा होता है कि घर का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। कई मकान मालिक घर को केवल रहने के लिए देते हैं।

अगर कोई व्यक्ति घर से काम करना चाहता है या छोटा दफ्तर चलाना चाहता है, तो यह बात पहले साफ होनी चाहिए। बिना अनुमति के गलत उपयोग करने पर agreement खत्म किया जा सकता है।

उपयोग अनुमति
रहने के लिए आमतौर पर अनुमति
दफ्तर या काम लिखित सहमति जरूरी
व्यापार अक्सर मना होता है

गलत उपयोग agreement तोड़ने का कारण बन सकता है।

मेहमान और रहने वालों से जुड़ी शर्तें

कुछ agreements में यह भी लिखा होता है कि कितने लोग घर में रह सकते हैं। कई बार लंबे समय तक रहने वाले मेहमानों पर आपत्ति जताई जाती है।

अगर परिवार के अलावा कोई और रहने वाला है, तो उसका नाम agreement में होना बेहतर रहता है।

  • रहने वालों की संख्या
  • लंबे समय के मेहमान
  • अन्य व्यक्ति की अनुमति

Pets रखने से जुड़ी शर्तें

अगर आपके पास पालतू जानवर हैं, तो यह बात पहले ही साफ कर लें। कई मकान मालिक pets की अनुमति नहीं देते।

अगर अनुमति दी गई है, तो उसकी शर्तें भी लिखी होनी चाहिए। नुकसान होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी तय होना चाहिए।

Pets से जुड़ी बातों को छिपाना नुकसानदायक हो सकता है।

Subletting और sharing से जुड़ी शर्तें

Subletting का मतलब होता है कि किरायेदार घर का कुछ हिस्सा किसी और को किराए पर दे दे। ज्यादातर agreements में इसकी अनुमति नहीं होती।

अगर sharing की अनुमति है, तो वह भी साफ लिखी होनी चाहिए। बिना अनुमति के ऐसा करना कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।

स्थिति परिणाम
बिना अनुमति subletting Agreement समाप्त
लिखित अनुमति कानूनी रूप से सही

Subletting से पहले शर्तें पढ़ना जरूरी है।

घर खाली करने की शर्तें

Rent agreement में घर खाली करने की प्रक्रिया लिखी होती है। नोटिस पीरियड, समय और शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए।

आमतौर पर एक या दो महीने का नोटिस देना पड़ता है। बिना नोटिस घर छोड़ने पर deposit कट सकता है।

  • नोटिस अवधि
  • लिखित सूचना
  • घर की स्थिति

घर खाली करते समय नियमों का पालन जरूरी है।

Notice period क्या होता है और क्यों जरूरी है

Rent agreement में notice period एक बहुत अहम शर्त होती है। इसका मतलब होता है कि घर खाली करने से पहले कितने समय पहले सूचना देनी होगी। यह शर्त मकान मालिक और किरायेदार दोनों पर लागू होती है।

अगर notice period का पालन नहीं किया गया, तो security deposit कट सकता है या विवाद खड़ा हो सकता है। इसलिए इस हिस्से को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

Notice अवधि मतलब
एक महीना 30 दिन पहले सूचना
दो महीने 60 दिन पहले सूचना

Notice period साफ लिखा होगा तो गलतफहमी नहीं होगी।

Agreement खत्म करने की शर्तें ध्यान से पढ़ें

Agreement खत्म करने की प्रक्रिया भी rent agreement में लिखी होती है। कई बार मकान मालिक किसी कारण से agreement बीच में खत्म कर सकता है।

यह देखा जाना चाहिए कि किन हालात में agreement तोड़ा जा सकता है और क्या किरायेदार को समय दिया जाएगा या नहीं।

  • किराया समय पर न देना
  • घर का गलत उपयोग
  • नियमों का उल्लंघन
  • लिखित चेतावनी

Agreement खत्म करने की शर्तें जितनी साफ होंगी, उतनी सुरक्षा रहेगी।

Police verification का महत्व

कई राज्यों में किरायेदार का police verification जरूरी होता है। यह सुरक्षा के लिहाज से किया जाता है।

Verification कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह agreement में लिखा होना चाहिए। कई जगह मकान मालिक यह प्रक्रिया करवाता है, तो कहीं किरायेदार को खुद करना पड़ता है।

बिंदु जानकारी
Verification जरूरी कई शहरों में अनिवार्य
जिम्मेदारी Agreement में तय

Police verification न कराने पर जुर्माना भी लग सकता है।

Stamp duty और registration से जुड़ी बातें

Rent agreement बनाते समय stamp duty का भी ध्यान रखना चाहिए। बिना stamp के agreement कानूनी रूप से कमजोर माना जाता है।

अगर agreement लंबी अवधि का है, तो registration जरूरी हो सकता है। यह नियम राज्य के हिसाब से अलग हो सकता है।

Stamp और registration से agreement मजबूत बनता है।

Furniture और सामान की सूची जरूर बनवाएं

अगर घर furnished है, तो agreement में सामान की पूरी सूची होनी चाहिए। कई बार सामान खराब होने को लेकर विवाद होता है।

सूची में बेड, अलमारी, पंखा, लाइट जैसी चीजें शामिल होनी चाहिए। उनकी स्थिति भी लिखी हो तो बेहतर होता है।

सामान स्थिति
पंखा सही हालत
लाइट काम करने योग्य
अलमारी ठीक

सामान की सूची विवाद से बचाती है।

Agreement साइन करने से पहले ये गलतियां न करें

बहुत लोग agreement पढ़े बिना साइन कर देते हैं। यह सबसे बड़ी गलती होती है। हर लाइन ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

  • बिना पढ़े साइन करना
  • मौखिक बातों पर भरोसा
  • कॉपी न रखना
  • शर्तें समझे बिना हां कहना

Agreement साइन करने से पहले सवाल पूछना आपका हक है।

Rent agreement से जुड़ी आम समस्याएं

Rent agreement होने के बावजूद कई समस्याएं सामने आती हैं। ज्यादातर समस्याएं साफ शर्तें न होने के कारण होती हैं। अगर agreement मजबूत है और हर बात लिखी हुई है, तो विवाद होने की संभावना कम हो जाती है।

स्पष्ट agreement दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होता है।

Rent agreement करते समय समझदारी क्यों जरूरी है

Rent agreement सिर्फ औपचारिकता नहीं है। यह आपकी रहने की शांति से जुड़ा मामला है। अगर agreement समझदारी से किया जाए, तो किरायेदार और मकान मालिक के रिश्ते बेहतर रहते हैं। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े नहीं होते। इसलिए rent agreement करते समय जल्दबाजी न करें। हर शर्त समझें। जरूरत पड़े तो सलाह भी लें।

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