ग्रामीण भारत में रोज़गार से जुड़ी सबसे बड़ी योजना को बदलने वाला फैसला आखिरकार संसद में पास हो गया। VB-G RAM G Bill के लागू होने के साथ ही MGNREGA की जगह एक नया ढांचा सामने आया है। यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं है। यह ग्रामीण रोज़गार की सोच, संरचना और जिम्मेदारी तीनों को प्रभावित करता है।
MGNREGA सालों तक ग्रामीण गरीबों के लिए सहारा बनी रही। जब भी काम की कमी हुई, यह योजना सुरक्षा कवच की तरह खड़ी दिखी। लेकिन समय के साथ इसमें कई चुनौतियाँ सामने आईं। सरकार का कहना है कि इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए नया कानून लाया गया है।
VB-G RAM G Bill को विकसित भारत की दिशा में एक कदम बताया जा रहा है। इसके समर्थक इसे रोजगार और विकास को जोड़ने वाला मॉडल मानते हैं। वहीं आलोचक इसे अधिकार आधारित व्यवस्था से पीछे हटना बता रहे हैं। इस बहस को समझने के लिए पहले यह जानना ज़रूरी है कि MGNREGA क्या थी और उसने क्या भूमिका निभाई।
MGNREGA क्या थी और इसका मूल उद्देश्य
MGNREGA ग्रामीण परिवारों को काम का कानूनी अधिकार देती थी। इसका मतलब यह था कि अगर कोई ग्रामीण परिवार काम की मांग करता है, तो सरकार को उसे रोजगार देना ही होगा। यह योजना सिर्फ सहायता नहीं थी, बल्कि अधिकार आधारित सुरक्षा थी।
इस योजना के तहत हर परिवार को साल में तय दिनों तक मजदूरी का काम दिया जाता था। इसका लक्ष्य केवल आय देना नहीं था। गांवों में तालाब, सड़क, जल संरक्षण और भूमि सुधार जैसे काम भी इसी के ज़रिये हुए।
कठिन समय में MGNREGA ने पलायन रोका। सूखा हो या महामारी, इस योजना ने ग्रामीण परिवारों को शहरों की ओर मजबूरी में जाने से बचाया। यही कारण है कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा गया।
MGNREGA सिर्फ रोजगार योजना नहीं थी, यह ग्रामीण जीवन की स्थिरता का आधार बनी।
MGNREGA को बदलने की ज़रूरत क्यों बताई गई
सरकार का तर्क है कि MGNREGA समय के साथ बोझिल होती गई। काम की मांग बढ़ती गई, लेकिन बजट पर दबाव भी बढ़ा। कई बार भुगतान में देरी हुई। इससे मजदूरों में असंतोष भी दिखा।
एक और बड़ा मुद्दा यह रहा कि काम का स्वरूप कई जगह उत्पादक नहीं रह गया। केवल मजदूरी पर ज़ोर था, लेकिन दीर्घकालिक आजीविका पर कम ध्यान दिया गया। सरकार का कहना है कि नई योजना इस कमी को दूर करेगी।
डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे। फर्जी जॉब कार्ड और गलत भुगतान जैसी शिकायतें सामने आईं। इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर नए कानून की ज़रूरत बताई गई।
VB-G RAM G Bill का मूल विचार क्या है
VB-G RAM G Bill का पूरा जोर रोजगार को विकास से जोड़ने पर है। इसमें केवल काम देने की बात नहीं है, बल्कि ऐसे काम पर ध्यान दिया गया है जो गांवों की आजीविका को मजबूत करें।
सरकार का कहना है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ संपत्ति तैयार करेगी। जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचा और आपदा से निपटने जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस कानून के तहत रोजगार के दिन बढ़ाए गए हैं। इसे MGNREGA से बेहतर और व्यापक मॉडल बताया जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही कई नई शर्तें भी जोड़ी गई हैं।
रोज़गार की गारंटी में क्या बदलाव हुआ
MGNREGA में रोजगार की एक तय सीमा थी। नए कानून में इस सीमा को बढ़ाया गया है। यह बदलाव देखने में सकारात्मक लगता है। लेकिन इसके साथ फंड आवंटन की व्यवस्था बदली गई है।
पहले काम की मांग के अनुसार बजट बढ़ाया जाता था। अब राज्यों को पहले से तय राशि के भीतर ही योजना चलानी होगी। अगर मांग ज़्यादा हुई, तो अतिरिक्त बोझ राज्यों पर आ सकता है।
यहीं से बहस शुरू होती है। आलोचकों का कहना है कि इससे रोजगार की वास्तविक गारंटी कमजोर हो सकती है। समर्थकों का मानना है कि इससे योजनाबद्ध और अनुशासित खर्च संभव होगा।
रोजगार के दिन बढ़ना राहत है, लेकिन फंड सीमा नई चिंता भी पैदा करती है।
राज्यों की भूमिका कैसे बदलेगी
VB-G RAM G Bill में केंद्र और राज्यों के बीच जिम्मेदारी को नए तरीके से बांटा गया है। राज्यों को अब योजना के क्रियान्वयन में अधिक वित्तीय जिम्मेदारी उठानी होगी।
कुछ राज्यों के लिए यह व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खासकर वे राज्य जहां रोजगार की मांग ज़्यादा रहती है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकारें इसे कैसे संभालती हैं।
यह बदलाव केंद्र और राज्य संबंधों को भी प्रभावित करेगा। योजना की सफलता काफी हद तक इसी संतुलन पर निर्भर करेगी।
इस पहले हिस्से में हमने समझा कि MGNREGA क्या थी, उसे क्यों बदला गया और VB-G RAM G Bill की बुनियाद क्या है। अगले हिस्से में हम नए कानून की संरचना, काम के प्रकार और इसके संभावित असर को विस्तार से देखेंगे।
पहले हिस्से में यह साफ हुआ कि VB-G RAM G Bill क्यों लाया गया और MGNREGA को क्यों बदला गया। अब ज़रूरी है यह समझना कि नया कानून ज़मीन पर कैसे काम करेगा। किसी भी रोजगार योजना की असली परीक्षा उसके ढांचे और क्रियान्वयन से होती है।
VB-G RAM G Bill को सिर्फ मजदूरी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका मिशन के रूप में पेश किया गया है। इसका मतलब है कि अब काम के प्रकार, भुगतान की सोच और जिम्मेदारी तीनों में बदलाव दिखाई देगा।
नए कानून में काम का स्वरूप कैसा होगा
MGNREGA के तहत काम का फोकस अधिकतर मजदूरी पर रहता था। कई जगह यह काम अस्थायी साबित हुआ। नए कानून में काम को चार बड़े क्षेत्रों से जोड़ा गया है।
पहला क्षेत्र जल से जुड़ा है। तालाब, जल संरक्षण और सिंचाई जैसे काम प्राथमिकता में रखे गए हैं। इसका उद्देश्य है कि गांवों में पानी की समस्या स्थायी रूप से हल हो सके।
दूसरा क्षेत्र ग्रामीण बुनियादी ढांचा है। इसमें सड़क, नालियां और सामुदायिक संपत्ति जैसे काम शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इससे गांवों की उत्पादक क्षमता बढ़ेगी।
तीसरा क्षेत्र आजीविका से जुड़ा है। इसमें ऐसे काम होंगे जो भविष्य में आय का साधन बन सकें। चौथा क्षेत्र आपदा प्रबंधन और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित रहेगा।
नए कानून में काम को अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक लाभ से जोड़ा गया है।
रोज़गार के दिनों में बदलाव का असली मतलब
VB-G RAM G Bill के तहत रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाई गई है। पहली नज़र में यह बदलाव मजदूरों के लिए राहत जैसा लगता है। ज़्यादा दिन काम का मतलब ज़्यादा आय।
लेकिन इसके साथ एक नई व्यवस्था भी आई है। अब रोजगार की उपलब्धता सीधे मांग पर निर्भर नहीं होगी। राज्यों को तय बजट के भीतर ही काम उपलब्ध कराना होगा।
अगर किसी राज्य में अचानक काम की मांग बढ़ जाती है, तो अतिरिक्त फंड की व्यवस्था राज्य को खुद करनी पड़ सकती है। यही बिंदु सबसे ज़्यादा चर्चा में है।
फंडिंग सिस्टम कैसे बदला गया है
MGNREGA में फंड की कोई तय सीमा नहीं थी। मांग बढ़ने पर केंद्र को पैसा देना पड़ता था। नए कानून में यह व्यवस्था बदली गई है।
अब हर राज्य के लिए पहले से एक अनुमानित बजट तय किया जाएगा। इसी के भीतर योजना चलाई जाएगी। यह बदलाव सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
इसके अलावा केंद्र और राज्य के बीच खर्च बांटने का अनुपात भी स्पष्ट किया गया है। इससे राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ेगी।
फंड की सीमा अनुशासन लाती है, लेकिन जरूरत के समय दबाव भी बढ़ा सकती है।
ग्रामीण मजदूरों पर इसका सीधा असर
ग्रामीण मजदूरों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें समय पर काम और भुगतान मिलेगा या नहीं। नया कानून इस भरोसे को कैसे बनाए रखेगा, यह देखने वाली बात होगी।
काम के प्रकार बदलने से कुछ मजदूरों को नए कौशल सीखने की ज़रूरत पड़ सकती है। यह अवसर भी है और चुनौती भी।
अगर काम स्थायी संपत्ति से जुड़ा होगा, तो इसका लाभ लंबे समय तक मिलेगा। लेकिन अगर बजट सीमित रहा, तो काम की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
Agricultural Pause का विचार
नए कानून में खेती के मौसम को ध्यान में रखते हुए एक प्रावधान जोड़ा गया है। इसमें कुछ समय के लिए काम रोका जा सकता है।
इसका उद्देश्य यह है कि किसान फसल के समय मजदूरी योजना और खेती के बीच न फंसे रहें। इससे कृषि कार्य प्रभावित न हों।
हालांकि आलोचक कहते हैं कि इससे मजदूरों की आय कुछ समय के लिए रुक सकती है। समर्थक इसे व्यावहारिक कदम मानते हैं।
राज्यों और पंचायतों की भूमिका
VB-G RAM G Bill में पंचायतों की भूमिका बनी हुई है। लेकिन राज्यों पर निगरानी और योजना का दबाव बढ़ेगा।
पंचायतों को अब ऐसे काम चुनने होंगे, जो लंबे समय में लाभ दें। केवल मजदूरी देना ही लक्ष्य नहीं रहेगा।
योजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य और पंचायतें इसे कितनी गंभीरता से लागू करती हैं।
इस दूसरे हिस्से में हमने नए कानून के ढांचे, काम के प्रकार और फंडिंग सिस्टम को समझा। अगले हिस्से में हम विरोध, आलोचना, राजनीतिक बहस और भविष्य के असर पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
VB-G RAM G Bill के संसद से पास होते ही देश की राजनीति और ग्रामीण समाज में बहस तेज़ हो गई। यह बहस सिर्फ किसी योजना के बदलने की नहीं है। यह सवाल उस सोच का है, जिसमें रोज़गार को अधिकार माना जाए या सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधा।
MGNREGA कई वर्षों तक ग्रामीण गरीबों के लिए एक भरोसा रही। इसलिए उसका हटना भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर प्रतिक्रिया लाया। नया कानून समर्थकों और विरोधियों के बीच साफ बंटा हुआ दिखाई देता है।
विपक्ष का विरोध किस बात पर है
विपक्ष का पहला और सबसे बड़ा विरोध अधिकार के सवाल पर है। उनका कहना है कि MGNREGA ने ग्रामीण परिवारों को काम का कानूनी अधिकार दिया था। नया कानून उस अधिकार को कमजोर करता है।
विपक्ष यह भी कहता है कि फंड की तय सीमा रोजगार की वास्तविक गारंटी को प्रभावित करेगी। अगर किसी साल बेरोज़गारी बढ़ी, तो राज्य सरकारों पर अतिरिक्त बोझ आएगा।
एक और बड़ा मुद्दा नाम से जुड़ा है। कई लोग मानते हैं कि MGNREGA का नाम केवल पहचान नहीं था, बल्कि उसकी सामाजिक स्वीकार्यता का कारण भी था।
विरोध का केंद्र नाम नहीं, बल्कि अधिकार आधारित ढांचे से हटना है।
सरकार की दलील क्या है
सरकार का कहना है कि VB-G RAM G Bill अधिकार को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे बेहतर ढांचे में बदलता है। उनका तर्क है कि केवल मजदूरी देने से गरीबी खत्म नहीं होती।
सरकार मानती है कि रोजगार को आजीविका और संपत्ति निर्माण से जोड़ना ज़रूरी था। इससे गांवों में स्थायी विकास होगा।
फंड की सीमा को सरकार वित्तीय अनुशासन के रूप में देखती है। उनके अनुसार इससे योजना ज़्यादा पारदर्शी और योजनाबद्ध बनेगी।
अधिकार बनाम योजना की बहस
इस पूरे विवाद का मूल यही है। क्या रोज़गार एक कानूनी अधिकार होना चाहिए या सरकार की योजना।
MGNREGA में काम मांगने पर सरकार बाध्य थी। VB-G RAM G में यह बाध्यता सीमित होती दिखती है।
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिकार आधारित मॉडल गरीबों के लिए ज़्यादा सुरक्षित होता है। वहीं कुछ का मानना है कि योजनाबद्ध मॉडल विकास को दिशा देता है।
यह बहस तय करेगी कि ग्रामीण रोजगार का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक असर
अगर VB-G RAM G Bill सही ढंग से लागू होता है, तो गांवों में स्थायी संपत्ति का निर्माण हो सकता है। जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे से खेती और रोजगार दोनों को फायदा मिल सकता है।
लेकिन अगर फंड की कमी हुई, तो सबसे पहले मजदूर प्रभावित होंगे। काम कम हुआ, तो पलायन फिर बढ़ सकता है।
राज्यों की भूमिका यहां निर्णायक होगी। जिन राज्यों के पास संसाधन और प्रशासनिक क्षमता है, वहां यह योजना बेहतर चल सकती है।
मजदूरों की सुरक्षा का सवाल
ग्रामीण मजदूर के लिए सबसे अहम बात समय पर काम और भुगतान है। कानून का नाम बदलने से यह ज़रूरत नहीं बदलती।
अगर भुगतान में देरी हुई या काम सीमित रहा, तो योजना पर भरोसा कमजोर होगा।
इसलिए ज़रूरी है कि निगरानी और पारदर्शिता को मजबूत किया जाए।
आगे का रास्ता क्या हो सकता है
VB-G RAM G Bill पूरी तरह गलत या पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता। इसका असर इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
अगर सरकार राज्यों के साथ सहयोग रखती है और जरूरत के समय लचीलापन दिखाती है, तो यह मॉडल काम कर सकता है।
लेकिन अगर इसे केवल बजट नियंत्रण के औज़ार की तरह देखा गया, तो ग्रामीण रोजगार को नुकसान हो सकता है।
निष्कर्ष
VB-G RAM G Bill ने MGNREGA की जगह ली है। यह बदलाव बड़ा है और इसके असर भी गहरे होंगे।
यह कानून ग्रामीण रोजगार को नई दिशा दे सकता है। लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं।
आखिरकार यह तय करेगा कि सरकार, राज्य और पंचायतें इसे किस भावना से लागू करती हैं। ग्रामीण भारत का भविष्य इसी संतुलन पर टिका है।
यह सिर्फ एक कानून नहीं है। यह ग्रामीण जीवन, काम और सम्मान से जुड़ा फैसला है।

