विजय की फिल्म Jana Nayagan ने रिलीज से पहले ही सुर्खियाँ बटोर ली हैं। यह विवाद कोई क्रिमिनल मामला नहीं है। न ही फिल्म पर कोई आपराधिक आरोप हैं। जो असल बात है, वह है सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर हुई कानूनी जंग। फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगी है और अब मामला Supreme Court तक पहुंच गया है। इस पार्ट में हम समझेंगे कि यह विवाद कैसे शुरू हुआ और अभी तक क्या हालात हैं।
🎥 Jana Nayagan: सर्टिफिकेशन विवाद की शुरुआत
भारत में कोई भी फिल्म थिएटर में तभी रिलीज़ हो सकती है जब उसे Central Board of Film Certification (CBFC) का U/A सर्टिफिकेट मिल जाए। यही नियम है और यही बात Jana Nayagan मामले में सबसे बड़ी मुद्दा बन गई।
निर्माताओं ने फिल्म पूरे एडिट के साथ समय पर बोर्ड में जमा कर दी थी। लेकिन कुछ शिकायतों और आपत्तियों के बाद CBFC ने सीधे सर्टिफिकेट जारी न करके इसे Review Committee के पास भेज दिया। इसी वजह से फिल्म का रिलीज़ डेट टल गया और पैसों का नुकसान बढ़ गया।
यह रोक फिल्म पर है, ना कि Vijay पर। निर्माताओं का कहना है कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया था।
📍 कोर्ट में कैसे पहुँचा मामला
- मेकर्स पहले मद्रास हाई कोर्ट गए और CBFC से सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश देने को कहा।
- एक सिंगल जज बेंच ने CBFC को सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया।
- लेकिन CBFC ने उस आदेश के खिलाफ अपील की।
- हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पहले वाले आदेश पर स्टे (रोक) लगा दिया।
- अब निर्माता Supreme Court में याचिका लेकर गए हैं।
📅 सुनवाई और स्टेटस (अभी तक)
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 9 जनवरी 2026 | फिल्म की तय रिलीज़ डेट पर सर्टिफिकेट नहीं मिला, रिलीज़ टल गया |
| 9 जनवरी 2026 | मद्रास हाई कोर्ट के सिंगल जज ने सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया |
| रात ही | डिवीजन बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी |
| 12 जनवरी 2026 | मेकर्स ने Supreme Court में याचिका दायर की |
| 15 जनवरी 2026 | Supreme Court में सुनवाई तय |
अब तक कोई अंतिम फैसला Supreme Court से नहीं आया है. सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ है और फिल्म अभी भी रिलीज़ के लिए रुकी हुई है।
❓ मामला क्यों गरमाया
यह मामला सिर्फ सर्टिफिकेट की देरी का नहीं रह गया। *Jana Nayagan* विजय की आख़िरी फिल्म के रूप में देखी जा रही है क्योंकि वे जल्द ही राजनीति में सक्रिय होने वाले हैं। इस वजह से कलाकारों, राजनीतिक हस्तियों और आलोचकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी है।
- कुछ लोग इसे Artistic Freedom का मुद्दा मानते हैं।
- कुछ का कहना है कि सेंसर बोर्ड बहुत सख्ती से पेश आ रहा है।
- दूसरे इसे राजनीतिक दखल के रूप में देखते हैं।
हालाँकि यह मामला किसी अपराध से जुड़ा नहीं है, लेकिन रिलीज़ डिले और कानूनी लड़ाई ने इसे मीडिया में बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया है।
⚖️ Supreme Court में क्या हुआ
जब मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी, तब Jana Nayagan के निर्माता सीधे Supreme Court पहुँच गए। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस वजह के सर्टिफिकेट रोका गया है और इससे उन्हें करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
Supreme Court ने मामले को गंभीर माना और CBFC से पूरा रिकॉर्ड मंगवाया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि फिल्म रिलीज पर रोक लगाना एक बहुत बड़ा कदम होता है और इसका ठोस कानूनी आधार होना चाहिए।
अभी Supreme Court ने फिल्म पर कोई नई रोक नहीं लगाई है, लेकिन हाई कोर्ट का स्टे अभी भी लागू है। मतलब अभी रिलीज़ नहीं हो सकती।
📑 CBFC ने क्या दलील दी
CBFC ने कोर्ट में कहा कि उन्हें कुछ आपत्तियाँ और शिकायतें मिली थीं। इसलिए उन्होंने फिल्म को तुरंत पास करने के बजाय Review Committee के पास भेजा।
- कुछ दृश्य राजनीतिक रूप से संवेदनशील बताए गए
- कुछ संवादों पर आपत्ति जताई गई
- कुछ शिकायतें सार्वजनिक हित से जुड़ी बताई गईं
CBFC का कहना है कि कानून उन्हें यह अधिकार देता है कि अगर कोई फिल्म विवादास्पद लगे तो उसे अतिरिक्त जांच के लिए रोका जाए।
🎬 मेकर्स का क्या कहना है
फिल्म के निर्माताओं ने कोर्ट में साफ कहा कि उन्होंने सभी जरूरी बदलाव पहले ही कर दिए थे। इसके बावजूद सर्टिफिकेट रोका गया, जो नियमों के खिलाफ है।
| मुद्दा | मेकर्स की बात |
|---|---|
| एडिटिंग | CBFC की सभी सुझाई कट्स पहले ही लागू |
| रिलीज डेट | थिएटर बुकिंग और प्रमोशन पहले से तय |
| नुकसान | हर दिन करोड़ों का घाटा |
| कानूनी हक | बिना वजह सर्टिफिकेट रोकना गलत |
मेकर्स का कहना है कि यह मामला फिल्म की अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ा है।
🧠 यह विवाद इतना बड़ा क्यों बन गया
यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं रहा। Vijay की यह फिल्म उनकी राजनीति में एंट्री से पहले की आखिरी फिल्म मानी जा रही है। इसलिए हर कदम पर भारी ध्यान है।
- राजनीतिक नेता इस पर बोल रहे हैं
- फिल्म इंडस्ट्री इसे सेंसरशिप का उदाहरण मान रही है
- फैंस इसे Vijay को निशाना बनाना समझ रहे हैं
📌 अभी की स्थिति एक लाइन में
Supreme Court सुनवाई कर रहा है, हाई कोर्ट का स्टे अभी लागू है, और Jana Nayagan इस वक्त रिलीज़ नहीं हो सकती।
🔮 आगे अब क्या हो सकता है
Supreme Court के सामने इस वक्त दो ही रास्ते खुले हैं। पहला, कोर्ट हाई कोर्ट के स्टे को हटाए और CBFC को फिल्म को सर्टिफिकेट देने का आदेश दे। दूसरा, कोर्ट कहे कि Review Committee की प्रक्रिया पूरी हो, उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाए।
| संभावित स्थिति | इसका मतलब |
|---|---|
| स्टे हटता है | फिल्म तुरंत U/A सर्टिफिकेट लेकर रिलीज हो सकती है |
| स्टे बना रहता है | रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट तक रिलीज़ नहीं |
| मामला वापस CBFC को | कुछ हफ्तों की और देरी |
अगर कोर्ट को लगे कि सेंसर बोर्ड ने बिना ठोस कारण देरी की है, तो वह सीधे रिलीज़ का रास्ता खोल सकता है।
🎬 रिलीज़ के तीन संभावित रास्ते
- Supreme Court से तुरंत हरी झंडी मिलना
- CBFC द्वारा Review Committee के बाद प्रमाणपत्र जारी करना
- कुछ सीमित कट्स के साथ U/A सर्टिफिकेट मिलना
फिल्म उद्योग में यह मामला उसी तरह देखा जा रहा है जैसे दूसरे संवेदनशील विषयों पर बहस होती है, जैसे प्रदूषण से होने वाली बीमारियों पर सरकारी नीतियों की चर्चा।
⚖️ इस केस से क्या संदेश जाता है
यह केस दिखाता है कि भारत में फिल्में केवल मनोरंजन नहीं हैं। वे राजनीति, समाज और कानून से जुड़ी होती हैं। इसलिए सेंसर बोर्ड का हर फैसला बड़ा असर डालता है।
अगर Supreme Court ने मेकर्स के पक्ष में फैसला दिया, तो भविष्य में CBFC को भी ज्यादा सावधानी से काम करना होगा।
❓ Jana Nayagan पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| क्या फिल्म बैन हुई है? | नहीं, सिर्फ सर्टिफिकेट रुका हुआ है |
| क्या Vijay पर केस है? | नहीं, मामला सिर्फ CBFC प्रक्रिया से जुड़ा है |
| क्या फिल्म रिलीज हो सकती है? | हां, अगर Supreme Court स्टे हटा देता है |
Jana Nayagan का मामला यह साफ करता है कि सेंसरशिप और रचनात्मक आज़ादी के बीच संतुलन कितना नाज़ुक है। Vijay की आखिरी फिल्म अब सिर्फ सिनेमा नहीं रही, यह एक कानूनी और राजनीतिक प्रतीक बन गई है।
अब सबकी निगाहें Supreme Court पर हैं। वहीं से तय होगा कि Jana Nayagan कब और कैसे सिनेमाघरों तक पहुंचेगी।

