West Bengal में Nipah Virus के 2 केस, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर

0 Divya Chauhan
Nipah virus update

Nipah Virus Update: West Bengal, India इस समय पूरे देश के लिए सतर्कता का विषय बन गया है। जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल से निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई है। दोनों मरीज स्वास्थ्यकर्मी हैं और एक ही निजी अस्पताल में कार्यरत थे। बीमारी ने तेजी से असर दिखाया और न्यूरोलॉजिकल समस्या तक पहुंच गई। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत निगरानी बढ़ा दी।

निपाह वायरस एक जानलेवा संक्रमण है। यह मुख्य रूप से चमगादड़ से मनुष्यों में फैलता है। कई बार दूषित फल या कच्चे खजूर के रस के माध्यम से संक्रमण होता है। इस वायरस के लिए अभी तक कोई पक्का टीका उपलब्ध नहीं है। इलाज केवल सहायक उपचार पर आधारित होता है। इसलिए समय पर पहचान सबसे जरूरी है।

पश्चिम बंगाल में क्या हुआ

दोनों संक्रमित मरीज नॉर्थ 24 परगना जिले के बारासात क्षेत्र से हैं। दोनों की उम्र 25 वर्ष है। एक महिला और एक पुरुष। दोनों अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत थे। दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में उनमें बुखार और कमजोरी के लक्षण दिखे। कुछ दिनों में हालत बिगड़ने लगी।

सरकारी जांच प्रयोगशाला ने 11 जनवरी को इन्हें संदिग्ध निपाह केस माना। इसके बाद पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु संस्थान ने 13 जनवरी को पुष्टि की। पुरुष मरीज की हालत में सुधार है। महिला मरीज अब भी गंभीर स्थिति में है।

स्वास्थ्य विभाग ने दोनों को तुरंत अलग वार्ड में रखा। इलाज विशेष निगरानी में जारी है।

सरकार की त्वरित कार्रवाई

मामलों की पुष्टि होते ही संपर्क में आए लोगों की पहचान की गई। कुल 196 लोगों को निगरानी सूची में रखा गया। सभी की जांच कराई गई। अभी तक किसी में संक्रमण नहीं पाया गया। सभी लोग बिना लक्षण के हैं।

केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की टीम पश्चिम बंगाल भेजी। राज्य सरकार के साथ मिलकर निगरानी तेज की गई। अस्पतालों को निर्देश दिए गए कि संदिग्ध मामलों पर तुरंत रिपोर्ट करें।

स्कूल और कॉलेज खुले हैं। लेकिन स्वास्थ्य निगरानी कड़ी कर दी गई है।

निपाह वायरस कैसे फैलता है

निपाह वायरस का मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ होते हैं। उनके मूत्र या लार से दूषित फल खाने पर संक्रमण हो सकता है। कुछ देशों में सूअर के माध्यम से भी यह फैला है।

कभी-कभी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। यह अधिकतर अस्पताल या घर के पास रहने वालों में देखा गया है। यह फैलाव आम तौर पर लंबे और निकट संपर्क से होता है।

  • दूषित फल या रस का सेवन
  • संक्रमित व्यक्ति की देखभाल
  • अस्पताल में बिना सुरक्षा संपर्क

लक्षण कैसे शुरू होते हैं

निपाह वायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य लग सकते हैं। इसलिए पहचान में देर हो जाती है। पहले बुखार, सिर दर्द और थकावट होती है। बाद में सांस की दिक्कत शुरू हो सकती है।

कुछ मामलों में मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। इससे बेहोशी, दौरे और बोलने में परेशानी हो सकती है। यही स्थिति सबसे खतरनाक मानी जाती है।

जल्दी इलाज से जान बच सकती है। देरी जानलेवा बन सकती है।

इस बार खतरा कितना है

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जोखिम को मध्यम स्तर का बताया है। अभी कोई बड़ा फैलाव नहीं देखा गया है। सभी संपर्कों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इस कारण पूरे देश में घबराने की जरूरत नहीं है।

फिर भी सीमा से लगे इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भारत-बांग्लादेश सीमा के पास चमगादड़ की मौजूदगी अधिक है। इस कारण वहां निगरानी बढ़ाई गई है।

स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन सावधानी जरूरी है।

हवाई अड्डों पर अलर्ट क्यों बढ़ा

पश्चिम बंगाल में मामलों की पुष्टि के बाद एशिया के कई देशों ने सावधानी बढ़ा दी है। भारत से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। थाईलैंड, नेपाल और वियतनाम जैसे देशों में तापमान जांच और स्वास्थ्य घोषणा पत्र अनिवार्य किया गया है।

हवाई अड्डों पर मेडिकल टीम तैनात की गई है। जिन यात्रियों में बुखार या कमजोरी के लक्षण दिखते हैं, उन्हें अलग जांच कक्ष में भेजा जा रहा है। इसका उद्देश्य संक्रमण को सीमा के बाहर फैलने से रोकना है।

यात्रा पर रोक नहीं लगी है। लेकिन जांच अब पहले से कड़ी है।

सरकार का आधिकारिक बयान

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्थिति नियंत्रण में है। सभी संपर्कों की जांच हो चुकी है। अब तक किसी नए मामले की पुष्टि नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि समय पर कदम उठाए गए हैं।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें गलत हैं। बड़े स्तर पर फैलाव की कोई पुष्टि नहीं हुई है। आम जनता से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है।

सरकार ने अफवाहों से बचने को कहा है। केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।

पहले भी भारत में आ चुका है निपाह

भारत में निपाह वायरस का यह सातवां मामला समूह माना जा रहा है। इससे पहले पश्चिम बंगाल में 2001 और 2007 में मामले सामने आए थे। दोनों बार सीमावर्ती जिलों में संक्रमण फैला था।

केरल में 2018 में बड़ा प्रकोप देखा गया था। उस समय कई लोगों की जान गई थी। इसके बाद देश ने निगरानी प्रणाली मजबूत की थी। यही वजह है कि इस बार समय पर पहचान हो सकी।

वर्ष राज्य स्थिति
2001 पश्चिम बंगाल सीमित फैलाव
2007 पश्चिम बंगाल क्लस्टर केस
2018 केरल गंभीर प्रकोप

निपाह वायरस इतना खतरनाक क्यों है

यह वायरस सीधे दिमाग को प्रभावित कर सकता है। इससे तेज बुखार के बाद सांस लेने में परेशानी होती है। कुछ मरीजों में दौरे और बेहोशी की स्थिति बन जाती है।

मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। इलाज केवल सहायक देखभाल पर आधारित होता है। यही वजह है कि इसे गंभीर बीमारी माना जाता है।

  • तेज बुखार और उल्टी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • दिमाग में सूजन
  • बेहोशी या दौरे

हर बुखार निपाह नहीं होता। लेकिन जांच जरूरी है।

अस्पतालों में क्या बदला

सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मरीजों को अलग रखा जाए। डॉक्टर और नर्सों को सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य किया गया है।

विशेष वार्ड बनाए गए हैं। जांच रिपोर्ट जल्दी आने की व्यवस्था की गई है। इससे बीमारी फैलने से रोकी जा सकती है।

स्वास्थ्यकर्मी सबसे पहले सुरक्षित रहेंगे। तभी मरीजों की रक्षा होगी।

WHO की सलाह क्या कहती है

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वर्तमान स्थिति पर करीबी निगरानी रखी जा रही है। अभी किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा या व्यापार पर रोक की जरूरत नहीं है। जोखिम केवल स्थानीय स्तर पर मध्यम माना गया है।

WHO का कहना है कि समय पर पहचान और अस्पतालों में सही नियंत्रण से फैलाव रोका जा सकता है। यही वजह है कि जांच और निगरानी सबसे महत्वपूर्ण कदम माने गए हैं।

स्थिति गंभीर है। लेकिन नियंत्रण में है।

आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों ने कुछ जरूरी सलाह दी हैं। इनका पालन करने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

  • कच्चा खजूर का रस न पिएं
  • फल अच्छे से धोकर ही खाएं
  • आधे कटे फल न खाएं
  • बीमार व्यक्ति से दूरी रखें
  • हाथ नियमित रूप से धोएं

साफ-सफाई ही सबसे बड़ी दवा है।

पश्चिम बंगाल में सामाजिक असर

इलाके में लोगों के बीच डर जरूर है। लेकिन प्रशासन ने साफ कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। स्कूल, दफ्तर और बाजार खुले हैं। केवल स्वास्थ्य सेवाओं को अतिरिक्त सतर्क किया गया है।

स्थानीय प्रशासन लोगों को सही जानकारी दे रहा है। अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है। पंचायत और नगर निकाय स्तर पर जागरूकता अभियान चल रहे हैं।

सूचना सही हो तो डर कम होता है।

भविष्य की स्थिति क्या हो सकती है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई नया मामला सामने नहीं आता, तो स्थिति स्थिर रहेगी। सीमावर्ती इलाकों में विशेष निगरानी जारी रहेगी।

सरकार ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अस्पताल सुविधाएं तैयार हैं। दवाइयों और सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति पर भी नजर रखी जा रही है।

पहलू स्थिति
नए मामले अब तक नहीं
निगरानी तेज
अस्पताल तैयारी पूरी

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों ने सतर्कता बढ़ा दी है। लेकिन स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। समय पर पहचान और सही इलाज से बड़ा खतरा टल गया है।

आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन सावधानी जरूरी है। साफ भोजन, स्वच्छता और सही जानकारी ही सबसे मजबूत सुरक्षा है।

सावधानी से ही सुरक्षा संभव है। जागरूकता से ही बचाव होगा।

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