बिहार में 2025 का कैबिनेट गठन इस समय पूरे राज्य में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। विधानसभा चुनाव के बाद जो राजनीतिक तस्वीर उभरी, उसने सत्ता समीकरणों को नई दिशा दे दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को 10वीं बार शपथ ली और इसी के साथ नई सरकार का अध्याय शुरू हुआ। अब जनता की निगाहें इस बात पर हैं कि इस सरकार में कौन-कौन मंत्री बने, किन चेहरों को महत्वपूर्ण भूमिका मिली और गठबंधन के अंदर जिम्मेदारियों का बंटवारा किस आधार पर हुआ।
इस बार का Cabinet Formation कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जनता बदलाव और विकास की उम्मीद के साथ नए मंत्रियों को देख रही है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के भीतर अलग-अलग दलों की मांगें भी नतीजों को प्रभावित कर रही हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कैबिनेट आने वाले 5 वर्षों की नीतिगत दिशा तय करेगा। ऐसी स्थिति में नए चेहरों, अनुभवी नेताओं और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट को अंतिम रूप देना नीतीश सरकार के लिए भी आसान नहीं था।
कैबिनेट गठन की प्रक्रिया में इस बार कई दिलचस्प पहलू देखने को मिले। एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की साख और उनका लंबे अनुभव का असर साफ दिखा, तो दूसरी ओर गठबंधन की प्रमुख पार्टी BJP की रणनीतिक भूमिका ने भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। इसी बीच LJP (RV) के चिराग पासवान की बढ़ी हुई राजनीतिक क्षमता ने भी इस कैबिनेट की दिशा को काफी हद तक प्रभावित किया।
बिहार कैबिनेट 2025 क्यों है इतना अहम?
2025 का बिहार कैबिनेट सिर्फ एक राजनीतिक संरचना नहीं है, बल्कि एक ऐसा प्रशासनिक ढांचा है जो राज्य की आर्थिक और सामाजिक विकास रणनीति को कई सालों तक प्रभावित करेगा। रोजगार, शिक्षा, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाएं, ग्रामीण विकास और डिजिटल बिहार जैसे बड़े विषय सरकार के सामने हैं। ऐसे में मंत्रियों का चयन और उनके विभागों का निर्धारण सीधा असर डालेगा कि कौन-सा क्षेत्र कितनी तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सरकार को तेज़ निर्णय, पारदर्शिता और विकास-केंद्रित योजनाओं पर ध्यान देना होगा। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में नई नीतियों और योजनाओं की जरूरत महसूस की जा रही है।
इसी बीच यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि युवा नेताओं को डिजिटल गवर्नेंस, IT और स्किल डेवलपमेंट जैसे आधुनिक विभाग दिए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी और तकनीकी सुधारों को गति मिल सके।
कौन मंत्री बन सकता है? सबसे मजबूत दावेदार
कैबिनेट गठन से पहले जिन नेताओं के नाम सबसे अधिक चर्चा में थे, उनमें अनुभवी चेहरे और युवा प्रतिनिधित्व दोनों शामिल थे। यह चुनावी नतीजों और राजनीतिक माहौल का मिश्रण था, जहां जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक क्षमता को प्राथमिकता दी गई।
- अनुभवी नेताओं को वित्त, गृह और सड़क निर्माण जैसे प्रमुख मंत्रालय मिलने की संभावना जताई गई थी।
- युवा नेताओं को IT, Skill Development और Urban Development जैसे आधुनिक विभाग मिलने की संभावना थी।
- महिला नेताओं को भी इस बार महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की चर्चा थी।
इसके साथ-साथ राजनीतिक दलों ने खुद भी यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि उन्हें ऐसे मंत्रालय मिलें जिनका प्रभाव उनके समर्थक वर्गों तक मजबूती से पहुंचे। यही वजह रही कि कैबिनेट गठन से पहले कई दौर की बैठकों में विभागों पर लंबी चर्चा चली।
Portfolio Predictions: किस मंत्रालय पर किसका दावा?
मंत्रालयों का बंटवारा हर बार की तरह इस बार भी राजनीतिक संतुलन का बड़ा विषय रहा। विभागों के आधार पर ही सरकारी योजनाओं की दिशा तय होती है, इसलिए सभी दलों ने स्वयं को मजबूत विभाग मिलने की उम्मीद जताई थी।
| संभावित मंत्रालय | संभावित नेता |
| वित्त विभाग | अनुभवी नेता |
| गृह मंत्रालय | सीएम के विश्वस्त नेता |
| स्वास्थ्य विभाग | युवा नेता या नया चेहरा |
| ऊर्जा विभाग | तकनीकी अनुभव वाले नेता |
बिहार कैबिनेट मंत्री सूची 2025 (Official Full List)
20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10वीं बार शपथ ली। उनके साथ कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें BJP, JD(U), LJP(RV), HAM और RLM के प्रतिनिधि शामिल रहे। यह सूची बिहार के नए राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की वास्तविक ताकत को दर्शाती है।
गठबंधन सरकार में मंत्रालयों का बंटवारा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक महत्व का भी होता है। इस बार की सूची में अनुभव, युवाओं की भागीदारी, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय प्रतिनिधित्व—सभी को जगह दी गई है।
| # | मंत्री का नाम | पार्टी |
| 1 | नीतीश कुमार (मुख्यमंत्री) | JD(U) |
| 2 | सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री) | BJP |
| 3 | विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री) | BJP |
| 4 | विजय कुमार चौधरी | JD(U) |
| 5 | विजेन्द्र यादव | JD(U) |
| 6 | श्रवण कुमार | JD(U) |
| 7 | लेशी सिंह | JD(U) |
| 8 | अशोक चौधरी | JD(U) |
| 9 | मदन सहनी | JD(U) |
| 10 | श्रेयासी सिंह | BJP |
| 11 | रामकृपाल यादव | BJP |
| 12 | रमा निषाद | BJP |
| 13 | रजनीश कुमार | BJP |
| 14 | संजय सरावगी | BJP |
| 15 | संजय कुमार सिंह | BJP |
| 16 | लखेंद्र कुमार रोशन | BJP |
| 17 | संजय सिंह "टाइगर" | BJP |
| 18 | दीपक प्रकाश | BJP |
| 19 | संतोष सुमन | HAM |
| 20 | Deepak Prakash | RLM |
| 21 | LJP (RV) के 2 मंत्री (नाम जल्द जारी) | LJP (RV) |
| 22 | एक मुस्लिम चेहरा (नाम अपडेट होगा) | — |
Chirag Paswan की भूमिका और गठबंधन का समीकरण
2025 के बिहार कैबिनेट गठन में चिराग पासवान की भूमिका सबसे अहम रही। उनकी पार्टी LJP (Ram Vilas) ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और गठबंधन के लिए ‘निर्णायक समर्थन’ की स्थिति में पहुंच गई। इसी वजह से उन्हें इस बार शक्ति संतुलन में सबसे प्रभावशाली नेता माना गया।
चिराग पासवान ने साफ संकेत दिया था कि उनकी पार्टी को ऐसे विभाग मिलने चाहिए जिनका सीधा असर विकास और जनसुविधाओं पर पड़ता हो। Industry, Urban Development, Rural Works जैसे मंत्रालयों की मांग उनके बढ़ते राजनीतिक कद को दर्शाती है।
- LJP (RV) को 3–4 मंत्रालय मिलने की चर्चा तेज रही।
- वे Industry और Infrastructure जैसे मजबूत विभाग चाहते थे।
- उनकी bargaining power गठबंधन में पहले से अधिक बढ़ चुकी है।
कैबिनेट गठन में देरी क्यों हुई?
सरकार बनने के बाद भी कैबिनेट गठन तुरंत नहीं हुआ। इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। गठबंधन सरकारों में दावेदारों की संख्या अधिक होती है, जबकि मंत्रालय सीमित होते हैं। ऐसे में आपसी सहमति बनाना समय लेता है।
- हर दल अपने प्रभाव वाले मंत्रालय चाहता था।
- क्षेत्रीय संतुलन एक बड़ा मुद्दा बना रहा।
- गठबंधन के भीतर विश्वास और तालमेल बैठाने में समय लगा।
बिहार के विकास पर नए कैबिनेट का असर
बिहार की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। रोजगार, शिक्षा, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य ढांचा, उद्योग और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे हमेशा से सरकार की प्राथमिकता में रहे हैं। ऐसे में 2025 का कैबिनेट आने वाले वर्षों में विकास की गति और उसकी विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित करेगा।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैबिनेट में योग्य, सक्रिय और अनुभवयुक्त नेताओं को सही जिम्मेदारी दी गई, तो राज्य में वास्तविक परिवर्तन देखे जा सकते हैं। यह सरकार केवल राजनीतिक समीकरणों पर आधारित न रहे, बल्कि विकास की ठोस दिशा तय करे—इसी उम्मीद के साथ जनता इस कैबिनेट को देख रही है।
बिहार की स्थिति को सुधारने के लिए कई क्षेत्रों में त्वरित सुधारों की जरूरत है। खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क व्यवस्था जैसे क्षेत्र जहां अभी भी अपेक्षित परिणाम देखने बाकी हैं। ग्रामीण इलाकों में छोटे अस्पतालों, प्राथमिक स्कूलों और सड़क संपर्क की कमजोर स्थिति अक्सर विकास को धीमा कर देती है।
कैबिनेट से विकास को कैसे गति मिलेगी?
यदि नए कैबिनेट में नेतृत्व मजबूत हुआ और मंत्रालयों का संचालन पारदर्शी तरीके से हुआ, तो विकास के कई अवसर सामने आएंगे। यहां कुछ प्रमुख क्षेत्रों को समझते हैं जहां नए मंत्रियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है:
- सड़क निर्माण: बेहतर कनेक्टिविटी उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचा सकती है।
- स्वास्थ्य ढांचा: सक्रिय नेतृत्व मिलने पर जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधर सकती है।
- Skill Development: युवाओं को रोजगार योग्य कौशल देने पर राज्य की रोजगार दर में सुधार संभव है।
- शिक्षा विभाग: स्कूलों और कॉलेजों में सुधार से बिहार की शिक्षा गुणवत्ता में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।
क्या गठबंधन स्थिर रह पाएगा?
गठबंधन की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि सभी दलों को सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले और विभागों का बंटवारा पारदर्शी तरीके से हो। यदि मंत्रालयों का विभाजन न्यायसंगत रहा, तो सरकार पूरे कार्यकाल तक स्थिर रह सकती है।
अब तक के संकेत बताते हैं कि गठबंधन के प्रमुख दलों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है। BJP, JD(U), LJP(RV), HAM और RLM—सबने मिलकर सत्ता साझेदारी में लचीलापन दिखाया है। यही रवैया आगे भी कायम रहा, तो गठबंधन लंबे समय तक मजबूती से चल सकता है।
चिराग पासवान की बढ़ती भूमिका और BJP का मजबूत आधार, दोनों ही सरकार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। वहीं नीतीश कुमार का अनुभव गठबंधन को संतुलित रखता है। इसलिए आने वाले समय में यह गठबंधन स्थिरता और प्रशासनिक नियंत्रण दोनों बनाए रख सकता है।
निष्कर्ष: बिहार 2025 में किस दिशा की ओर बढ़ रहा है?
2025 का Bihar Cabinet Formation राज्य के राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस कैबिनेट से जनता को कई उम्मीदें हैं—चाहे वह रोजगार के अवसर हों, शिक्षा में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं का विकास, या फिर सड़क और औद्योगिक परियोजनाओं का विस्तार।
सरकार के सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं, लेकिन यदि सभी मंत्री मिलकर योजनाओं को धरातल पर लागू करें, तो बिहार अगले कुछ वर्षों में तेज प्रगति कर सकता है। यह कैबिनेट अनुभव और युवा ऊर्जा का नया मिश्रण है, जो राज्य को नई दिशा दे सकता है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग दिए जाते हैं और वे विभाग राज्य के विकास में किस तरह योगदान देते हैं। जनता की उम्मीदें ऊंची हैं और अब गेंद कैबिनेट के पाले में है।

