Confederation of Central Government Employees and Workers ने देशव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है। यह हड़ताल 12 फरवरी 2026 को होगी। यह एक दिन की nationwide strike होगी।
इस हड़ताल में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े कर्मचारी भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
Strike की औपचारिक सूचना Cabinet Secretary को भेज दी गई है।
Strike की आधिकारिक जानकारी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| Strike Date | 12 फरवरी 2026 |
| Strike Type | One Day Nationwide Strike |
| Strike Call By | Confederation of Central Govt Employees & Workers |
| Strike Notice Date | 23 जनवरी 2026 |
हड़ताल की सूचना संविधानिक प्रक्रिया के तहत दी गई है।
Strike क्यों बुलाई गई
Confederation का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। सरकार से कई बार बातचीत हुई। लेकिन समाधान नहीं निकला।
इसी कारण अब सामूहिक आंदोलन का रास्ता चुना गया है।
- महंगाई का असर बढ़ा
- वेतन सुधार में देरी
- पेंशन व्यवस्था पर असंतोष
- नौकरी सुरक्षा को लेकर चिंता
हड़ताल का उद्देश्य दबाव बनाना बताया गया है।
Strike Notice में क्या लिखा गया
Strike Notice Cabinet Secretary को भेजा गया है। इसमें साफ कहा गया है कि Confederation से जुड़े संगठन 12 फरवरी 2026 को काम बंद करेंगे।
पत्र में यह भी बताया गया है कि मांगों की सूची पहले ही सरकार को सौंपी जा चुकी है।
| पत्र का विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पत्र प्राप्तकर्ता | Cabinet Secretary, Government of India |
| पत्र भेजने वाला | Secretary General, Confederation |
| Strike अवधि | एक दिन |
हड़ताल पूरी तरह संगठित रूप में की जाएगी।
किन विभागों पर असर पड़ सकता है
Confederation से जुड़े कई विभाग strike में भाग ले सकते हैं। इससे आम लोगों को असुविधा हो सकती है।
- डाक विभाग
- रेलवे से जुड़े कार्यालय
- आयकर और GST कार्यालय
- बीमा और पेंशन कार्यालय
सरकारी सेवाओं पर सीमित असर पड़ने की संभावना है।
सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
Confederation का कहना है कि यह strike केवल शुरुआत है। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आगे आंदोलन तेज किया जाएगा।
यह हड़ताल चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
आगे और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
Confederation of Central Government Employees and Workers ने हड़ताल के साथ अपनी विस्तृत मांगों की सूची भी सरकार को सौंपी है। इस सूची को Charter of Demands कहा गया है। इसमें कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े आर्थिक और सेवा संबंधी मुद्दे शामिल हैं।
मांगों का उद्देश्य वेतन, पेंशन और नौकरी सुरक्षा को मजबूत करना बताया गया है।
कर्मचारी और पेंशनर से जुड़ी मांगें)
वे मुद्दे रखे गए हैं जो सीधे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े हैं। Confederation का कहना है कि इन मांगों से कर्मचारियों को तत्काल राहत मिलेगी।
| मांग | क्या बदलाव चाहते हैं |
|---|---|
| 8th CPC ToR में संशोधन | वेतन और पेंशन में सुधार के सुझाव शामिल हों |
| 50% DA का विलय | Basic Pay और Pension में जोड़ा जाए |
| 20% Interim Relief | तुरंत राहत के रूप में भुगतान |
| NPS/UPS समाप्त | पुरानी पेंशन योजना बहाल |
| DA Arrears | कोविड काल के 18 माह का भुगतान |
Confederation का कहना है कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं।
पेंशन से जुड़ी मांगें
पेंशनरों के लिए अलग से कई बिंदु रखे गए हैं। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी समान सम्मान मिलना चाहिए।
- सभी पेंशनरों के लिए समान नियम
- कम्यूटेड पेंशन 11 साल में बहाल
- न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग
- परिवार पेंशन में सुधार
पेंशन को जीवन यापन से जोड़कर देखा जा रहा है।
श्रम और सामाजिक मुद्दे
केवल केंद्र सरकार कर्मचारी ही नहीं, बल्कि संविदा, असंगठित और कृषि श्रमिकों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
| मांग | उद्देश्य |
|---|---|
| चार श्रम कानून रद्द | मजदूर हितों की रक्षा |
| Outsourcing बंद | स्थायी रोजगार सुनिश्चित |
| Equal Pay for Equal Work | संविदा कर्मियों को समान वेतन |
| Minimum Pension ₹9000 | सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षा |
| Price rise control | जरूरी वस्तुओं पर राहत |
मांगों में सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।
भर्ती और Outsourcing पर मांग
Confederation का कहना है कि सरकार को खाली पद तुरंत भरने चाहिए। Outsourcing से नौकरी की स्थिरता खत्म होती है।
- सभी रिक्त पद भरे जाएं
- संविदा व्यवस्था खत्म हो
- नियमित नियुक्ति बढ़े
रोजगार सृजन भी प्रमुख मांगों में शामिल है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाएं
Charter में शिक्षा और स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के रूप में लागू करने की मांग भी रखी गई है। साथ ही नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की बात कही गई है।
सरकारी विभागों के निजीकरण का विरोध भी किया गया है।
मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं।
Confederation of Central Government Employees and Workers की ओर से घोषित 12 फरवरी 2026 की हड़ताल अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गई है। कई विभागों में कर्मचारियों ने तैयारी शुरू कर दी है। बैठकों और सभाओं का दौर चल रहा है।
संघ का कहना है कि यह हड़ताल केवल चेतावनी है। यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आगे और बड़े आंदोलन किए जाएंगे।
यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना है।
हड़ताल का आम जनता पर संभावित असर
अगर बड़ी संख्या में कर्मचारी हड़ताल में शामिल होते हैं, तो कुछ सरकारी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि संगठन का कहना है कि आपात सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा।
| सेवा | संभावित असर |
|---|---|
| डाक और बैंकिंग कार्यालय | आंशिक कामकाज |
| कर और पेंशन दफ्तर | देरी संभव |
| बीमा और लेखा कार्यालय | सेवाएं धीमी |
संगठन ने कहा है कि आम जनता को कम से कम असुविधा हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।
सरकार की स्थिति और संकेत
अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक वार्ता की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों के अनुसार शिक्षा, वित्त और कार्मिक मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
संभावना है कि हड़ताल से पहले या बाद में वार्ता की पहल हो सकती है।
सरकार फिलहाल टकराव से बचने की नीति अपना सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
कुछ राजनीतिक दलों ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। वहीं कुछ ने इसे दबाव की राजनीति बताया है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है।
श्रम संगठनों ने एकजुटता दिखाने की बात कही है।
यह मुद्दा केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा।
आगे की रणनीति क्या हो सकती है
Confederation का कहना है कि यदि हड़ताल के बाद भी मांगों पर चर्चा नहीं हुई, तो आंदोलन को लंबा खींचा जा सकता है। इसमें रैलियां और धरना प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं।
- राजधानी में बड़ा प्रदर्शन
- राज्य स्तर पर सभाएं
- अन्य संगठनों से समर्थन
आंदोलन की दिशा सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
Final Conclusion
12 फरवरी 2026 की हड़ताल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का परिणाम है। वेतन, पेंशन और नौकरी सुरक्षा जैसे मुद्दे इसके केंद्र में हैं। अब निगाहें सरकार और Confederation के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह आंदोलन केवल एक दिन तक सीमित रहता है या आगे और तेज होता है।



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