Sugar बढ़ने के शुरुआती लक्षण, जिन्हें लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं

0 Divya Chauhan
Sugar बढ़ने के शुरुआती लक्षण

Sugar बढ़ने के शुरुआती लक्षण अक्सर इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें सामान्य थकान, उम्र का असर या रोज़मर्रा की परेशानी समझकर टाल देते हैं। लेकिन शरीर बिना वजह कोई संकेत नहीं देता। जब खून में शुगर धीरे-धीरे बढ़ने लगती है, तो शरीर संतुलन बनाने की कोशिश करता है और उसी दौरान कुछ संकेत सामने आते हैं। अगर इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए, तो आगे की बड़ी दिक्कतों से बचा जा सकता है।

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि की वजह से शुगर की समस्या उम्र की सीमा नहीं देखती। पहले जो परेशानी बुजुर्गों में दिखती थी, अब वही संकेत युवाओं और यहां तक कि तीस की उम्र से पहले भी नज़र आने लगे हैं। इसलिए शुरुआती लक्षणों को समझना हर किसी के लिए ज़रूरी हो गया है।

बार-बार प्यास लगना

शुगर बढ़ने का सबसे आम और शुरुआती संकेत बार-बार प्यास लगना है। जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ती है, तो शरीर अतिरिक्त शुगर को पेशाब के ज़रिये बाहर निकालने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में शरीर से पानी ज्यादा निकल जाता है, जिससे प्यास लगती है।

अगर आप सामान्य से कहीं ज्यादा पानी पी रहे हैं और फिर भी मुंह सूखा लगता है, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। खासकर जब यह आदत कई दिनों तक बनी रहे।

💧 बार-बार प्यास लगना शरीर का संकेत हो सकता है कि अंदर कुछ असंतुलन चल रहा है।

बार-बार पेशाब आना

अधिक प्यास के साथ-साथ बार-बार पेशाब आना भी शुगर बढ़ने का संकेत माना जाता है। खासकर रात में नींद से उठकर बार-बार वॉशरूम जाना एक चेतावनी हो सकती है।

यह इसलिए होता है क्योंकि किडनी खून से अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करती है। इस प्रक्रिया में पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है।

अचानक थकान महसूस होना

अगर बिना ज्यादा मेहनत के भी शरीर थका हुआ महसूस करता है, तो यह भी एक शुरुआती लक्षण हो सकता है। शुगर बढ़ने पर शरीर की कोशिकाएं सही तरीके से ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं कर पातीं।

इसका नतीजा यह होता है कि पर्याप्त खाना खाने के बावजूद भी कमजोरी और सुस्ती बनी रहती है।

बार-बार भूख लगना

कुछ लोगों में शुगर बढ़ने पर बार-बार भूख लगने लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, भले ही खून में शुगर ज्यादा हो।

  • खाना खाने के कुछ समय बाद फिर भूख लगना
  • मीठा खाने की तीव्र इच्छा
  • भूख के साथ चिड़चिड़ापन

🍽️ बार-बार भूख लगना सिर्फ आदत नहीं, शरीर का संकेत भी हो सकता है।

वज़न का बिना वजह घट जाना

कुछ मामलों में लोग देखते हैं कि वे ठीक से खा रहे हैं, फिर भी वज़न घट रहा है। यह संकेत खासतौर पर तब दिखता है जब शुगर काफी समय से बढ़ रही हो।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों और फैट को तोड़ने लगता है।

Sugar बढ़ने के शुरुआती लक्षण केवल प्यास या थकान तक सीमित नहीं रहते। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-छोटे बदलाव दिखने लगते हैं, जिन्हें अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन यही संकेत भविष्य की बड़ी परेशानियों से पहले की चेतावनी होते हैं।

धुंधला दिखाई देना

शुगर बढ़ने पर आंखों के लेंस पर असर पड़ सकता है, जिससे अचानक धुंधला दिखाई देने लगता है। यह समस्या कभी-कभी अपने आप ठीक भी हो जाती है, इसलिए लोग इसे थकान या स्क्रीन टाइम का असर समझ लेते हैं।

अगर बार-बार धुंधलापन महसूस हो, तो यह नजरअंदाज करने वाली बात नहीं है।

घाव का देर से भरना

छोटे कट या चोट का देर से ठीक होना भी शुगर बढ़ने का संकेत हो सकता है। ज्यादा शुगर की वजह से रक्त संचार और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है।

नतीजा यह होता है कि मामूली घाव भी ठीक होने में ज्यादा समय लेते हैं।

बार-बार इंफेक्शन होना

त्वचा, मसूड़ों या यूरिन से जुड़ा इंफेक्शन बार-बार होना भी एक संकेत है। शुगर बढ़ने पर बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है।

  • त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते
  • मसूड़ों से खून आना
  • बार-बार यूरिन इंफेक्शन

हाथ-पैर में झनझनाहट

कुछ लोगों को शुरुआती दौर में ही हाथ या पैरों में झनझनाहट महसूस होने लगती है। यह नसों पर असर का शुरुआती संकेत हो सकता है।

यह समस्या हल्की होती है, लेकिन समय के साथ बढ़ सकती है।

त्वचा का रूखा और खुजलीदार होना

बार-बार पेशाब आने और शरीर से पानी की कमी की वजह से त्वचा रूखी हो सकती है। इसके साथ खुजली भी महसूस हो सकती है।

🖐️ त्वचा के छोटे बदलाव भी अंदरूनी समस्या का संकेत दे सकते हैं।

अगर ये लक्षण दिखें तो क्या करें

लक्षणतुरंत कदम
अधिक प्यासब्लड शुगर जांच
थकानडाइट और नींद पर ध्यान
धुंधली नजरडॉक्टर से सलाह
घाव देर से भरनाइंफेक्शन से बचाव

Sugar बढ़ने के शुरुआती लक्षण पहचान लेने के बाद अगला सवाल होता है कि अब क्या किया जाए। सही समय पर उठाए गए छोटे कदम आगे चलकर बड़ी परेशानी से बचा सकते हैं। यहां बात सिर्फ दवाओं की नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव की भी होती है।

जांच करवाना क्यों जरूरी है

अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कई एक साथ दिखें, तो ब्लड शुगर की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। खाली पेट और खाने के बाद की जांच से स्थिति साफ हो जाती है।

समय पर जांच से यह पता चल जाता है कि समस्या शुरुआती स्तर पर है या आगे बढ़ चुकी है।

खानपान में क्या बदलाव करें

शुरुआती लक्षणों के दौरान खानपान पर ध्यान देना सबसे अहम होता है। मीठा, ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड खाना कम करना जरूरी है।

  • हरी सब्ज़ियां ज्यादा शामिल करें
  • साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं
  • मीठे पेय से दूरी बनाएं
  • भोजन का समय तय रखें

शारीरिक गतिविधि का रोल

रोज़ाना हल्की एक्सरसाइज़ या तेज़ चाल से चलना शुगर नियंत्रण में मदद करता है। इससे शरीर शुगर का बेहतर इस्तेमाल करता है।

बहुत भारी कसरत की जरूरत नहीं, नियमितता ज्यादा जरूरी है।

तनाव और नींद का असर

लगातार तनाव और कम नींद भी शुगर बढ़ने की वजह बन सकते हैं। मानसिक संतुलन और पूरी नींद शरीर के हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है।

🧘 सही नींद और कम तनाव शरीर को संतुलन में रखते हैं।

नियमित निगरानी क्यों जरूरी है

एक बार शुगर बढ़ने के संकेत मिल जाएं, तो नियमित निगरानी बहुत जरूरी हो जाती है। इससे पता चलता रहता है कि किए गए बदलाव असर कर रहे हैं या नहीं।

छोटे-छोटे सुधार लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकते हैं।

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