वंदे मातरम… सिर्फ दो शब्द नहीं, बल्कि भारत के हर नागरिक के दिल में बसने वाली भावना है। इस गीत ने आज़ादी के समय जो ऊर्जा दी, वही आज भी देश के भीतर एकता और गर्व का प्रतीक है।
साल 2025 में जब इस गीत के 150 साल पूरे हुए, तो पूरे भारत ने इसे एक ऐतिहासिक उत्सव के रूप में मनाया। लेकिन इस गीत की यात्रा कहां से शुरू हुई, इसे किसने लिखा और यह इतना खास क्यों है — यही समझना इस पहले भाग का उद्देश्य है।
📜 बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रचना की कहानी
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। वह उस समय ब्रिटिश शासन के अंतर्गत बंगाल के एक अधिकारी थे। उनकी कलम में राष्ट्रप्रेम और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान था।
कहा जाता है कि एक दिन जब उन्होंने अंग्रेज अफसरों को भारत माता का अपमान करते देखा, तब उनके दिल में एक प्रेरणा जागी — भारत माता की स्तुति में ऐसा गीत लिखा जाए जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करे। उसी क्षण उन्होंने “वंदे मातरम” लिखा।
Fact: बंकिम चंद्र ने यह गीत सबसे पहले संस्कृत और बंगला भाषा के मिश्रण में लिखा था — ताकि हर भारतीय इसे समझ सके और महसूस कर सके।
📖 आनंदमठ और गीत का उदय
1875 में लिखा गया यह गीत बाद में उनकी प्रसिद्ध किताब “आनंदमठ” में शामिल हुआ। यह उपन्यास 1882 में प्रकाशित हुआ था, जिसमें ब्रिटिश शासन के खिलाफ संन्यासियों के विद्रोह की कहानी थी।
आनंदमठ के पात्र “वंदे मातरम” को राष्ट्रभक्ति के नारे के रूप में गाते हैं। यही वह क्षण था जब यह गीत सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया।
- इस गीत ने लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने की ताकत दी।
- स्वतंत्रता आंदोलन के हर चरण में “वंदे मातरम” गूंजता रहा।
- 1910 के दशक में यह गीत सभाओं और आंदोलनों का नारा बन गया।
Quote: रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था — “वंदे मातरम कोई गीत नहीं, यह भारतीय आत्मा की आवाज है।”
स्वतंत्रता संग्राम में “वंदे मातरम” की भूमिका
1905 में जब बंगाल विभाजन हुआ, तब इस गीत ने पूरे राष्ट्र को जोड़ने का काम किया। स्कूलों, मंदिरों और गलियों में “वंदे मातरम” गूंजने लगा।
ब्रिटिश सरकार ने जब इस गीत पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, तब भी भारतीयों ने इसे गाना बंद नहीं किया। छात्र, कार्यकर्ता और आम नागरिक इस गीत को राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में अपनाते गए।
- 1917 में कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में इसे आधिकारिक रूप से गाया गया।
- महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस दोनों ने इस गीत को अपने भाषणों में शामिल किया।
- यह गीत जेलों तक में गाया गया, जब स्वतंत्रता सेनानी आज़ादी की मांग कर रहे थे।
इस गीत के हर शब्द में एक गहराई है — “वंदे मातरम” का अर्थ है “हे मातृभूमि, मैं तेरा वंदन करता हूँ”। यह सिर्फ देशभक्ति नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक श्रद्धा है।
🌾 गीत के शब्दों का अर्थ
गीत के मूल शब्द संस्कृत में हैं, लेकिन उनका अर्थ बेहद सरल और गहरा है:
| पंक्ति | अर्थ |
|---|---|
| वंदे मातरम् | हे माँ, मैं तेरा वंदन करता हूँ। |
| सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम् | जल और फल से भरी, ठंडी मलय पवन से शीतल भूमि। |
| शस्य श्यामलां मातरम् | हरियाली से लदी हुई, समृद्ध भूमि। |
इन शब्दों में भारत को केवल एक देश नहीं, बल्कि एक देवी स्वरूप माना गया है — जो हमें पोषण देती है, जीवन देती है और प्रेरणा देती है।
Insight: वंदे मातरम ने भारतीयों को यह याद दिलाया कि उनका देश सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि भावना और पहचान है।
🎶 संगीत और स्वर – पहली बार कब गाया गया?
पहली बार वंदे मातरम को रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन में स्वरबद्ध कर गाया था। उस पल सभा में मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
बाद में यह गीत पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर और अन्य संगीतकारों द्वारा भी अलग-अलग धुनों में गाया गया। धीरे-धीरे यह पूरे भारत का राष्ट्रगीत बन गया।
- कई भारतीय स्कूलों में आज भी प्रार्थना के बाद वंदे मातरम गाया जाता है।
- रेडियो और दूरदर्शन पर विशेष राष्ट्रीय अवसरों पर यह गीत प्रसारित होता है।
- वर्ष 1950 में इसे भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।
⚖️ संविधान में स्थान और सम्मान
भारत के संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया। संविधान में लिखा गया कि इसे “जन गण मन” की तरह ही सम्मान दिया जाएगा।
इसके बाद हर सरकारी कार्यक्रम, विद्यालय समारोह और राष्ट्रीय दिवस पर इस गीत का गायन एक परंपरा बन गया।
Fact: 1950 के संविधान सभा अधिवेशन में जब इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया, तब पूरा सदन खड़ा होकर वंदे मातरम गाने लगा था।
🕊️ आज के भारत में इसका महत्व
आज वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय पहचान का प्रतीक है। जब कोई व्यक्ति इन दो शब्दों को बोलता है, तो उसके भीतर गर्व और शक्ति की भावना जाग उठती है।
यह गीत आज भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रमों में गाया जाता है। इससे युवा पीढ़ी को अपने देश के प्रति सम्मान और अपनापन महसूस होता है।
वंदे मातरम के 150 वर्ष – राष्ट्रव्यापी उत्सव और प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
साल 2025 भारत के लिए बेहद खास रहा। इस वर्ष देश ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने का गौरव मनाया। पूरे भारत में इसे एक साल लंबा राष्ट्रीय उत्सव घोषित किया गया, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।
7 नवंबर 2025 को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित किया और इस गीत के ऐतिहासिक महत्व को याद किया।
🗣️ पीएम मोदी का भाषण – “यह गीत भारत की आत्मा है”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम” सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा —
PM Modi Quote: “वंदे मातरम ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी। इसने एक ऐसा भाव जगाया जिसने देश को गुलामी की बेड़ियों से आज़ाद करवाया।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला वर्ष 2026 तक यह उत्सव जारी रहेगा और देश के हर कोने में ‘Vande Mataram @150’ थीम पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- प्रधानमंत्री ने एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया।
- देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में “Mass Singing Event” आयोजित किया गया।
- उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे “वंदे मातरम” की भावना को जीवन में उतारें।
कार्यक्रम के दौरान हजारों छात्रों, कलाकारों और सैन्य बैंड ने एक साथ वंदे मातरम गाकर इतिहास रच दिया।
🏛️ दिल्ली में राष्ट्रीय समारोह – ऐतिहासिक पल
दिल्ली के मुख्य समारोह में न केवल प्रधानमंत्री बल्कि देश के कई वरिष्ठ मंत्री, कलाकार और विद्यार्थी मौजूद थे। मंच पर पूरे भारत की विविधता को दर्शाने वाले पारंपरिक परिधान और संगीत प्रस्तुत किए गए।
- कार्यक्रम की शुरुआत शंखनाद और सरस्वती वंदना से हुई।
- रवींद्रनाथ टैगोर के मूल स्वर में “वंदे मातरम” गाया गया।
- आर्टिस्ट्स ने LED स्क्रीन पर भारत माता का डिजिटल प्रस्तुतीकरण दिखाया।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 20,000 से अधिक लोग शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और यातायात के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की थीं।
Fact: समारोह के दौरान 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि दलों ने पारंपरिक शैली में वंदे मातरम प्रस्तुत किया — जो भारत की एकता का प्रतीक बना।
🌆 मुंबई, गुजरात और राज्यों में कार्यक्रम
दिल्ली के बाद देशभर में “वंदे मातरम के 150 वर्ष” मनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित हुए। हर राज्य ने इसे अपने विशेष अंदाज में मनाया।
🏙️ मुंबई
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रालय में राज्यस्तरीय आयोजन का नेतृत्व किया। मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर शाम को विशेष लाइट शो हुआ जिसमें “Vande Mataram 150 Years” के शब्द आसमान में जगमगाए।
- राज्यभर के स्कूलों और कॉलेजों में एक साथ गीत गाया गया।
- मराठी, हिंदी और अंग्रेज़ी में एक साथ लाइव प्रसारण हुआ।
- बच्चों के लिए “Draw Your India” प्रतियोगिता आयोजित की गई।
🏞️ गुजरात
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया। साबरमती रिवरफ्रंट पर शाम को विशाल “वंदे मातरम रन” आयोजित हुई जिसमें हज़ारों युवाओं ने भाग लिया।
- शहर की दीवारों पर “Vande Mataram @150” थीम वाली पेंटिंग्स बनाई गईं।
- स्कूलों में इतिहास आधारित प्रदर्शनी आयोजित की गई।
- संगीत अकादमी में छात्रों ने बंकिम चंद्र पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया।
🏙️ कोलकाता
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मभूमि कोलकाता में यह उत्सव और भी भावुक रहा। यहां “Bankim Bhavan” को सजाया गया और उनके द्वारा लिखी मूल पांडुलिपि प्रदर्शित की गई।
- बंगाली संगीतकारों ने पारंपरिक शैली में गीत गाया।
- बंकिम चंद्र की स्मृति में नई मूर्ति का अनावरण हुआ।
- विश्वविद्यालयों में "Vande Mataram Quiz" आयोजित हुआ।
Stat: देशभर में कुल 50,000 से अधिक संस्थानों ने एक साथ “वंदे मातरम” गाया — यह भारत का सबसे बड़ा सामूहिक गायन रिकॉर्ड बना।
🎉 युवाओं और स्कूलों की भागीदारी
इस वर्ष के समारोह में युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रही। स्कूलों और कॉलेजों में “Vande Mataram Anthem Day” मनाया गया। छात्रों ने भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों, झंडे और गीत पर आधारित मॉडल्स और निबंध तैयार किए।
- “Digital Vande Mataram” अभियान लॉन्च किया गया जहां छात्र वीडियो अपलोड कर सकते हैं।
- सोशल मीडिया पर #VandeMataram150Years ट्रेंड करता रहा।
- AICTE और NCERT ने संयुक्त रूप से एक ऑनलाइन क्विज़ शुरू की।
Fact: केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूके, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदायों ने भी इस गीत का उत्सव मनाया।
💡 सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रदर्शनी
“वंदे मातरम 150” कार्यक्रम के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय ने कई एक्सहिबिशन्स और डिजिटल डिस्प्ले आयोजित किए। इन प्रदर्शनों में गीत का इतिहास, पुराने ऑडियो रिकॉर्ड्स और बंकिम चंद्र की हस्तलिखित पांडुलिपियाँ दिखाई गईं।
- दिल्ली के नेशनल म्यूज़ियम में “Vande Mataram Through Ages” प्रदर्शनी।
- कोलकाता में “Voice of Freedom” फोटो गैलरी।
- चेन्नई में संगीत परंपरा को दर्शाने वाली लाइव सिंगिंग इवेंट।
हर राज्य ने इसे अपने लोकसंगीत और पारंपरिक कला के साथ जोड़ा, जिससे यह उत्सव न केवल देशभक्ति बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।
🕊️ राष्ट्रव्यापी सामूहिक गायन – एकता का क्षण
7 नवंबर को सुबह 11 बजे पूरे देश में एक साथ “Vande Mataram” गाया गया। सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर लोग खड़े होकर गीत गा रहे थे।
यह दृश्य पूरे भारत को जोड़ने वाला था — एक देश, एक स्वर, एक भावना।
Insight: यह पहला मौका था जब भारत सरकार ने किसी सांस्कृतिक प्रतीक को एक वर्ष तक मनाने का अभियान चलाया — जिससे वंदे मातरम का महत्व नई पीढ़ी तक पहुंचे।
🏆 वंदे मातरम @150 – आगे की योजना
सरकार ने घोषणा की कि यह उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि एक वर्ष लंबा अभियान रहेगा। आने वाले महीनों में “Vande Mataram Marathon”, “Kala Utsav”, “Patriotic Poetry Nights” और “Vande Mataram Literature Series” जैसी गतिविधियाँ होंगी।
मंत्रालयों और विश्वविद्यालयों को इस अवसर पर विशेष प्रतियोगिताओं और सेमिनार आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
Final Thought: यह उत्सव सिर्फ अतीत की याद नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा है — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी “वंदे मातरम” के अर्थ और आत्मा को महसूस कर सकें।
वंदे मातरम के 150 वर्ष – जनता की प्रतिक्रिया और आधुनिक भारत में महत्व
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि आम जनता ने भी इस गीत के प्रति अपनी भावना खुलकर व्यक्त की। सोशल मीडिया, स्कूल, और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों ने इस अवसर को देशभक्ति के उत्सव में बदल दिया।
7 नवंबर 2025 का दिन यादगार रहा, जब भारत के हर कोने से लोगों ने “वंदे मातरम” गाते हुए अपने वीडियो और संदेश साझा किए। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस गीत को अपनी पहचान के रूप में महसूस किया।
💬 सोशल मीडिया पर “#VandeMataram150Years” ट्रेंड
इस दिन ट्विटर (अब X), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर #VandeMataram150Years सबसे ज़्यादा ट्रेंड में रहा। लाखों पोस्ट्स और रील्स ने इस गीत को फिर से लोकप्रिय बना दिया।
- युवाओं ने “One Nation One Song” टैगलाइन के साथ वीडियो बनाए।
- कई स्कूलों ने अपने समूह गायन की झलकियां साझा कीं।
- संगीतकारों ने आधुनिक बीट्स पर इस गीत के नए वर्ज़न पेश किए।
कई मशहूर हस्तियों ने भी इस मौके पर ट्वीट किया। अमिताभ बच्चन, विराट कोहली, ए.आर. रहमान और लता मंगेशकर फाउंडेशन जैसी हस्तियों ने वंदे मातरम की भावना को सलाम किया।
Fact: सिर्फ 24 घंटों में “Vande Mataram” से जुड़े 12 लाख से अधिक पोस्ट X (Twitter) और Instagram पर डाले गए — यह किसी भी सांस्कृतिक अवसर के लिए अब तक का सबसे बड़ा ऑनलाइन रिकॉर्ड था।
🧒 युवाओं की भूमिका – नई पीढ़ी और देशभक्ति का संगम
वंदे मातरम के 150 साल के उत्सव में सबसे बड़ा योगदान युवाओं का रहा। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र संगठनों ने वर्कशॉप्स, स्किट्स और निबंध प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं जिनका विषय था — “What Vande Mataram Means to Me”.
इस अभियान ने नई पीढ़ी को बताया कि वंदे मातरम केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि एक जीती-जागती भावना है जो हर भारतीय के भीतर बसती है।
- युवा कलाकारों ने स्ट्रीट परफॉर्मेंस के जरिए गीत को जीवंत किया।
- स्कूलों में छात्रों ने तिरंगे रंगों से पोस्टर बनाए।
- ऑनलाइन क्विज़ और निबंध प्रतियोगिताओं में लाखों छात्रों ने भाग लिया।
🌍 सामाजिक प्रभाव और एकजुटता का संदेश
“वंदे मातरम 150” ने केवल देश के भीतर नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय समुदायों को एकजुट किया। अमेरिका, यूके, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में प्रवासी भारतीयों ने इस अवसर पर सामूहिक गायन कार्यक्रम किए।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक था कि चाहे भारतीय कहीं भी हों, उनकी जड़ें भारत माता से ही जुड़ी हैं। देशभक्ति की यह भावना सीमाओं से परे है।
समाज में एकजुटता और जागरूकता जैसे अभियान आज भी महत्वपूर्ण हैं — जैसे हाल ही में आयोजित International Overdose Awareness Day, जिसने युवाओं में संवेदनशीलता बढ़ाने का काम किया।
🇮🇳 देशभक्ति और स्वतंत्रता का नया अर्थ
वंदे मातरम अब सिर्फ एक ऐतिहासिक गीत नहीं रहा, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए यह आत्म-सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि आज़ादी केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक कर्तव्य भी है।
स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर जब यह गीत गूंजता है, तो यह हमें हमारे इतिहास, बलिदान और एकता की याद दिलाता है। इसी भावना को विस्तार देने के लिए आप पढ़ सकते हैं Independence Day: Rare Facts and Full History — जो भारत की आज़ादी की अनकही कहानियों को उजागर करता है।
- यह गीत हमें बताता है कि देश की सेवा हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
- यह एकता, शांति और विकास का प्रतीक बन गया है।
- यह गीत जाति, भाषा या धर्म से ऊपर उठकर भारतीयता का प्रतीक है।
📱 डिजिटल युग में “वंदे मातरम”
डिजिटल इंडिया के इस दौर में “वंदे मातरम” ने नई तकनीक के साथ अपनी पहचान और भी मजबूत की है। अब यह गीत सिर्फ स्कूलों या आयोजनों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन भी हर जगह सुनाई देता है।
- AI और AR (Augmented Reality) के जरिए वंदे मातरम थीम वीडियो बनाए गए।
- YouTube पर “Vande Mataram Reimagined” प्लेलिस्ट ट्रेंड में रही।
- देशभर के influencers ने “Sing Your Vande Mataram” चैलेंज शुरू किया।
इन डिजिटल अभियानों ने यह साबित किया कि भले ही समय बदल गया हो, लेकिन देशभक्ति की भावना अब भी उतनी ही गहरी है।
Stat: 2025 में Spotify और YouTube पर “Vande Mataram” से जुड़े गीतों को 10 करोड़ से अधिक बार सुना गया — यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
💭 लोगों की भावनाएँ – “नाम ही नहीं, भावना है”
कई लोगों ने कहा कि यह गीत सुनते ही उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कुछ के लिए यह बचपन की याद है, तो कुछ के लिए यह देश के प्रति गर्व का प्रतीक।
एक कॉलेज छात्रा ने कहा — “वंदे मातरम सुनते ही लगता है जैसे कोई अंदर से ताकत दे रहा हो।” वहीं एक सैनिक ने अपने वीडियो संदेश में लिखा — “हमारे लिए यह गीत सिर्फ सुर नहीं, शपथ है।”
🕊️ एकता का प्रतीक और नई प्रेरणा
वंदे मातरम का सबसे बड़ा संदेश यही है — “हम सब एक हैं।” यह गीत भारत की विविधता में एकता का उदाहरण है। अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के बावजूद यह हमें एक सूत्र में बांधता है।
जब भी यह गीत गाया जाता है, यह हमारे दिलों में एक नया जोश भर देता है। यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनैतिक आज़ादी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, समानता और एकता भी है।
Final Thought: “वंदे मातरम” अब केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की धड़कन है — जो हर युग में हमें याद दिलाती है कि हमारी पहचान हमारी मातृभूमि है।

