Kis Kisko Pyaar Karoon 2 एक हल्की-फुल्की कॉमेडी दुनिया में दोबारा कदम रखती है, जहाँ Kapil Sharma अपनी उसी पुरानी उलझन, गलतफहमी और भाग-दौड़ वाली दुनिया में लौटते दिखते हैं। पहली फिल्म की तरह इस बार भी कहानी का आधार एक ही है—एक आदमी, कई रिश्ते, और उन रिश्तों के जाल में फँसा उसका रोज़मर्रा का संघर्ष। लेकिन सवाल यह है कि क्या दूसरी फिल्म में कुछ नया दिया गया है या फिर वही पुराना स्वाद दोहराया गया है? दर्शकों की नज़र से देखें तो कहानी में ताज़गी कम और परिचितपन अधिक महसूस होता है।
फिल्म शुरू होती है मुख्य किरदार की उसी बेचैनी से, जहाँ वह अपनी निजी जिंदगी में संतुलन बनाने की कोशिश करता है। हँसी पैदा करने के लिए स्थितियाँ गढ़ी गई हैं, लेकिन कई जगह हास्य थोड़ा मजबूर-सा प्रतीत होता है। Kapil की कॉमिक टाइमिंग आज भी प्रभावी है, लेकिन स्क्रिप्ट की सीमाएँ उनके प्रदर्शन को पूरी तरह खुलने नहीं देतीं। फिल्म हल्की है, मनोरंजक क्षण भी देती है, पर गहराई और भावनात्मक स्तर पर कमज़ोर है।
🎭 कलाकारों का प्रदर्शन – कौन चमका और कौन फीका?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका बड़ा और दिलचस्प कलाकार समूह है। Kapil Sharma अपनी खास comic शैली के साथ कहानी को आगे बढ़ाते हैं। Manjot Singh कई दृश्यों में ऊर्जा भरते हैं और कहानी को गति देते हैं। Tridha Choudhury और Parul Gulati अपने किरदारों में सहज दिखाई देती हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएँ सीमित दायरे में घूमती हैं।
Hira Warina और Ayesha Khan नए चेहरे होने के बावजूद स्क्रीन पर अपना प्रभाव छोड़ती हैं। उनकी मौजूदगी चमकदार है, पर उन्हें लिखित कहानी में उतनी गहराई नहीं दी गई। Asrani, Akhilendra Mishra और Sushant Singh जैसे अनुभवी कलाकार फिल्म में मजबूती जोड़ते हैं और कई दृश्य अपनी उपस्थिति से रोचक बनाते हैं। Jamie Lever और Smita Jaykar भी हास्य और भावनात्मक संतुलन प्रदान करती हैं।
| कलाकार | भूमिका |
| Kapil Sharma | मुख्य किरदार |
| Manjot Singh | सहायक भूमिका |
| Tridha Choudhury | Meera |
| Parul Gulati | Saniya |
| Ayesha Khan | सह-नायिका |
| Govardhan Asrani | कॉमिक सहायक |
| Akhilendra Mishra | मुख्य सह-कलाकार |
| Sushant Singh | Inspector David |
😂 हास्य – क्या वही पुरानी चमक बाकी है?
फिल्म का आधार हास्य है, और कुछ दृश्यों में यह मज़बूत दिखाई भी देता है। Kapil के हावभाव और बोलने की शैली दर्शकों को हँसाती है। लेकिन कई दृश्यों में मजाक दोहराव लगते हैं। पहले भाग की तुलना में इस बार नए हास्य मोड़ कम दिखाई देते हैं। कॉमेडी का वह प्राकृतिक flow कहीं-कहीं टूट जाता है, जिससे दृश्य थोड़े बनावटी दिखते हैं।
फिल्म देखने वालों को हल्की-फुल्की हँसी तो मिलेगी, लेकिन पिछली फिल्म जैसी लगातार हँसी इस बार कम दिखाई देती है। 🙂
📖 कहानी – नया क्या है?
कहानी एक आदमी की उलझनों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। कई रिश्तों को संभालना, उनसे जुड़ी स्थितियाँ और उनसे पैदा होने वाले मजाक—यह सब पहले भाग जैसा ही है। दूसरी फिल्म में उम्मीद थी कि कहानी कुछ नया मोड़ लाएगी या मुख्य किरदार की दुनिया को और गहराई देगी। लेकिन screenplay ज्यादातर पुराने फॉर्मूले पर चलता है।
कुछ भावनात्मक क्षण भी जोड़े गए हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त समय या विस्तार नहीं मिलता। फिल्म मनोरंजन दे सकती है, पर कहानी से नई उम्मीद रखने वाले दर्शक थोड़े निराश हो सकते हैं।
🎥 निर्देशन – कहाँ कमी रह गई?
निर्देशन हल्का-फुल्का और सरल रखा गया है, लेकिन गति कई जगह धीमी पड़ जाती है। हास्य दृश्यों की लय बनाए रखने में चुनौतियाँ दिखती हैं। कई दृश्य अच्छे बन सकते थे, पर editing और screenplay संतुलन नहीं बना पाते। फिल्म में कुछ अनोखा दिखाने की कोशिश होती है, पर execution साधारण स्तर पर रह जाता है।
फिल्म मनोरंजन देती है, पर उम्मीद जितनी नहीं। 5 में से 2.5 स्टार एक संतुलित रेटिंग लगती है। ⭐⭐✰☆☆
🎶 संगीत और तकनीकी पक्ष
संगीत फिल्म की गति में मधुरता जोड़ने की कोशिश करता है, लेकिन कोई गीत बहुत लंबे समय तक याद नहीं रहता। बैकग्राउंड स्कोर हल्का है और comic scenes को सहारा देता है। कैमरा वर्क साफ-सुथरा है, पर कुछ दृश्यों में अधिक रचनात्मकता की गुंजाइश दिखती है।
Kis Kisko Pyaar Karoon 2 अपने पहले भाग की लोकप्रियता के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश करती है, लेकिन यह प्रयास आधा सफल और आधा अधूरा महसूस होता है। फिल्म के दूसरे हिस्से में यह स्पष्ट हो जाता है कि कहानी मनोरंजन तो दे सकती है, पर अपनी भावनाओं में उतनी पकड़ नहीं बना पाती। कई कॉमिक स्थितियाँ हँसी देती हैं, लेकिन वही स्थितियाँ कभी-कभी थकान भी पैदा करती हैं। दर्शक शुरुआत में कहानी के साथ जुड़ते हैं, मगर आगे जाकर प्रवाह थोड़ा भारी लगने लगता है।
🎭 किरदारों के बीच रसायन – क्या तालमेल बन पाया?
फिल्म में किरदारों की संख्या अधिक है, और यही इसकी ताकत भी बनती है और कमजोरी भी। Kapil Sharma केंद्र में रहते हैं, लेकिन Manjot Singh और अन्य किरदारों के साथ उनका तालमेल कई जगह अच्छा दिखाई देता है। खासकर वे दृश्य जहाँ उलझनें एक साथ फटती हैं और कहानी हास्य रूप लेती है, दर्शक मज़ा लेते हैं।
लेकिन कुछ जगह किरदारों के संवाद बहुत तेजी से बदलते हैं, जिससे उनका प्रभाव कमजोर होता है। Tridha Choudhury और Parul Gulati स्क्रीन पर सुंदर और प्राकृतिक लगती हैं, पर उनके किरदारों को वह मजबूती नहीं दी गई जिसके कारण दर्शक उनसे जुड़ सकें।
Ayesha Khan और Hira Warina फिल्म के नए चेहरों में शामिल हैं। उनकी मौजूदगी ताज़गी लाती है, पर दोनों को लिखित रूप में सीमित दायरा दिया गया है। कई दृश्यों में उनकी उपस्थिति केवल मुख्य किरदार की उलझनें बढ़ाने तक सीमित रहती है।
🎬 कहानी की गति – कहाँ अटकी और कहाँ चली?
फिल्म की गति एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरती है। कई कॉमिक दृश्यों में कहानी रुक-रुक कर आगे बढ़ती है। जैसे ही दर्शक किसी स्थिति में हँसने लगते हैं, अगला दृश्य थोड़ा असंबंधित-सा लगता है। यह खिंचाव कहानी की ऊर्जा कम कर देता है। पहले भाग की तुलना में, इस बार कहानी में नए मोड़ कम हैं और पुराने फॉर्मूले का अधिक उपयोग किया गया है।
फिल्म का मध्य हिस्सा बिखरा हुआ महसूस होता है। कई दृश्य अचानक शुरू हो जाते हैं और अचानक खत्म भी हो जाते हैं, जिससे मज़ा टूटता नजर आता है। यदि screenplay में थोड़ी और स्पष्टता होती, तो इन दृश्यों का प्रभाव बढ़ सकता था।
दर्शकों को हल्का मनोरंजन मिलता है, पर कहानी की गहराई कम है और गति योजना से बाहर होती हुई महसूस होती है। यह फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। 💡
😂 हास्य स्तर – क्या यह दर्शकों को पकड़े रखता है?
Kapil Sharma की टाइमिंग हमेशा की तरह मजबूत है। कई punch lines पर थिएटर में हँसी गूँजती है। लेकिन जब स्क्रिप्ट कमजोर होती है तो केवल कलाकार का प्रयास काफी नहीं होता। फिल्म में कुछ नए comic angles आज़माए गए हैं, पर वे गहरी पकड़ नहीं बनाते।
कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जहाँ पात्रों की गलतफहमियाँ मिलकर अच्छी comedy पैदा करती हैं। लेकिन कई ऐसे क्षण भी हैं जो खिंचे हुए लगते हैं। ऐसा लगता है कि हास्य का भार केवल Kapil के कंधों पर डाल दिया गया है, जबकि बड़ी कहानी को समर्थन देने के लिए बाकी पात्रों को और मजबूती चाहिए थी।
🎞 तकनीकी पक्ष – क्या फिल्म आधुनिक अनुभव देती है?
फिल्म का तकनीकी पक्ष मध्यम स्तर का है। कैमरा वर्क फ्लैट है, पर साफ-सुथरा। कुछ दृश्य खूबसूरती से शूट किए गए हैं, लेकिन कुल मिलाकर visual शैली में कोई खास नवीनता नहीं है। Editing भी कई जगह तेज़ हो सकती थी जिससे हास्य बेहतर बहता।
संगीत धीमा और हल्का है, जो कहानी के स्वरूप के अनुरूप है। लेकिन कोई भी गीत विशेष याद नहीं रह जाता। बैकग्राउंड धुनें comic moments को सहारा देती हैं, पर उन्हें ऊँचा नहीं उठातीं।
| तकनीकी भाग | मूल्यांकन |
| निर्देशन | औसत |
| Editing | धीमी |
| सिनेमैटोग्राफी | साफ-सुथरी पर सामान्य |
| संगीत | हल्का |
🎭 बड़े कलाकार – क्या अनुभव काम आया?
Govardhan Asrani एक बार फिर अपनी हास्य कला से कई दृश्यों को जीवंत बनाते हैं। उनकी टाइमिंग और संवाद शैली फिल्म में तुरंत असर डालती है। Akhilendra Mishra का अभिनय प्रभावशाली है और वे कई भावों को सहजता से प्रस्तुत करते हैं। Sushant Singh Inspector David के रूप में अपने सख्त लेकिन हास्यपूर्ण अंदाज़ से कहानी में मज़ेदार मोड़ जोड़ते हैं।
Jamie Lever भी फिल्म में हल्की फुहार जैसी मौजूदगी देती हैं। उनकी स्क्रीन उपस्थिति स्वाभाविक और आकर्षक है। Smita Jaykar और Supriya Shukla परिवारिक दृश्यों में अपने अभिनय से भावुकता की एक परत जोड़ती हैं, जिससे फिल्म थोड़ी संतुलित महसूस होती है।
📌 भावनात्मक पहलू – क्या जुड़ाव बना?
पहली फिल्म की तरह इस बार भी भावनात्मक पहलू कमज़ोर है। फिल्म दर्शक को हँसी देती है, लेकिन मन में कोई गहरी छाप नहीं छोड़ती। कुछ दृश्यों में हल्का भावनात्मक तनाव दिखता है, पर उन्हें विस्तार नहीं मिलता। कहानी का उद्देश्य हँसाना है, और भावनाओं को केवल सहायक रूप में रखा गया है।
भावनात्मक रूप से फिल्म कमजोर है, लेकिन मनोरंजन चाहने वालों के लिए हल्की-फुल्की सवारी जरूर है। 🙂
⭐ अंतिम राय – क्या फिल्म देखने लायक है?
फिल्म मनोरंजन देती है, लेकिन उम्मीदों पर पूरी नहीं उतरती। कई कलाकारों की अभिनय क्षमता का पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया। Kapil अपनी पूरी ऊर्जा के साथ दिखते हैं, लेकिन कहानी उनके लिए मजबूत आधार नहीं बनाती। इसलिए 5 में से 2.5 स्टार उचित लगता है—न बहुत अच्छा और न बहुत खराब, बल्कि मध्यम स्तर का मनोरंजन।
Kis Kisko Pyaar Karoon 2 का अंतिम हिस्सा कहानी को समेटने की कोशिश करता है, लेकिन यहाँ भी वही पैटर्न दिखाई देता है—हास्य, भाग-दौड़, गलतफहमियाँ और Kapil का हर स्थिति से बचने का प्रयास। दर्शक उम्मीद करते हैं कि अंत में कोई बड़ा ट्विस्ट आएगा या कहानी नई दिशा लेगी, पर ऐसा नहीं होता। घटनाएँ सरल क्रम में आगे बढ़ती हैं और अंत भी हल्का-फुल्का रखा गया है। यह दर्शकों को मुस्कान तो देता है, पर प्रभाव गहरा नहीं छोड़ता।
🎯 अंतिम एक्ट – क्या फिल्म ने दम दिखाया?
फिल्म के अंतिम अध्याय में हास्य तेजी से बढ़ता है। सभी किरदार एक ही जगह इकट्ठा होते हैं और भ्रम की स्थिति चरम पर पहुँचती है। इन दृश्यों में Kapil की टाइमिंग और सह-कलाकारों की उपस्थिति दर्शकों को तुरंत जोड़ती है। लेकिन समस्या वही रहती है—कहानी में गहराई नहीं आती। अंतिम एक्ट मनोरंजन देता है, लेकिन यादगार नहीं बन पाता। दर्शक हँसते हैं, लेकिन कहानी के साथ भावनात्मक जुड़ाव नहीं बन पाता।
अंतिम भाग में हँसी है, लेकिन उद्देश्य हल्का है। फिल्म सरल मनोरंजन बनकर रह जाती है। 🙂
📌 कहानी का मूल्यांकन – क्या यह सही दिशा में गई?
फिल्म की कहानी का उद्देश्य स्पष्ट था—मनोरंजन, भ्रम और कॉमिक स्थितियाँ। इस लक्ष्य तक फिल्म पहुंचती है, लेकिन नई परतें जोड़ने में असफल रहती है। पहली फिल्म की सफलता के बाद दर्शक दूसरी फिल्म से कुछ अलग या गहरा अनुभव चाहते थे, लेकिन sequel पुराने स्टाइल को ही दोहराता है। कहानी में novelty की कमी इसे औसत श्रेणी में ले आती है।
कई secondary पात्रों को अधिक स्क्रीन मिलना चाहिए था ताकि कहानी और रोचक बनती। हास्य ही फिल्म की मुख्य ताकत है, लेकिन जब कहानी उसे मजबूत आधार नहीं देती, तो असर कमजोर पड़ जाता है।
🎭 एक्टिंग – कौन सबसे आगे रहा?
Kapil Sharma फिल्म की पूरी रीढ़ बने रहते हैं। उनकी presence और टाइमिंग फिल्म को संभालती है। Manjot Singh और Ayesha Khan कई हल्के-फुल्के क्षणों में चमकते हैं। Tridha Choudhury और Parul Gulati को सीमित अवसर मिले, लेकिन उन्होंने अपनी उपस्थिति मजबूत रखी। Akhilendra Mishra और Sushant Singh जैसे वरिष्ठ कलाकारों ने कहानी में भार जोड़ा और comic chaos में संतुलन दिया।
कुल मिलाकर, फिल्म में एक्टिंग अच्छी है, पर किरदारों को बेहतर लिखना चाहिए था ताकि दर्शक उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ सकें।
🎬 निर्देशन और screenplay – बड़ी कमजोरी
निर्देशक ने फिल्म को सरल स्वाद में रखने की कोशिश की है, लेकिन screenplay कमजोर पड़ जाती है। कई दृश्य बिना तैयारी के शुरू होते हैं और जल्दी समाप्त हो जाते हैं। कॉमिक फिल्मों में timing सबसे महत्वपूर्ण होती है, और यही कई जगह खोती हुई नजर आती है। यदि screenplay मजबूत होता, तो कलाकारों का प्रदर्शन और भी दमदार दिख सकता था।
फिल्म का Execution औसत स्तर पर है। विचार अच्छा था, पर उसे विस्तार देने में कमी रह गई। 🎥
🌟 क्या फिल्म देखने लायक है?
यदि आप Kapil Sharma के प्रशंसक हैं या हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन यदि आप कहानी की मौलिकता और गहराई की तलाश में हैं, तो यह फिल्म निराश कर सकती है। हल्का मनोरंजन, सरल हँसी और भीड़ वाला हास्य—यही इस फिल्म की पहचान है। रेटिंग 2.5 स्टार इसी संतुलन को दर्शाती है।
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- Tere Ishq Mein Movie Review – भावनाओं और संगीत का मिश्रण
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🏁 अंतिम निष्कर्ष
Kis Kisko Pyaar Karoon 2 एक हल्का मनोरंजन देने वाली कॉमेडी है, जो दर्शकों को कभी-कभी हँसाती है लेकिन गहरा प्रभाव नहीं छोड़ती। फिल्म का उद्देश्य मज़ा देना है, और वह उद्देश्य सीमित रूप में पूरा होता है। लेकिन कहानी की मजबूती, screenplay का प्रवाह और हास्य की नई परतें जोड़ना—ये सब पहलू कमजोर रह जाते हैं। फिर भी यदि आप सरल मनोरंजन चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार के लिए ठीक है।

